संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। धनघटा तहसील में चकबंदी लेखपाल की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तारी ने एक बार फिर सरकारी दफ्तरों में भ्रष्टाचार पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
लगातार कार्रवाई और गिरफ्तारी के बावजूद तहसीलों व अन्य सरकारी कार्यालयों में रिश्वत मांगने की शिकायतें कम नहीं हो रही हैं। चकबंदी लेखपाल अभय सिंह की गिरफ्तारी एक साल के भीतर तीसरी गिरफ्तारी है। इसके पूर्व भी दो कर्मी ऐसे ही मामलों में पकड़े जा चुके हैं।
लोगों के मुताबिक कई मामलों में जांच बैठती है, कुछ कर्मचारियों पर कार्रवाई भी होती है लेकिन व्यवस्था में अपेक्षित सुधार दिखाई नहीं देता। ताजा मामला धनघटा तहसील का है, जहां चकबंदी लेखपाल अभय सिंह को रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। कार्रवाई के बाद पुलिस ने आरोपी को न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया। इसके बाद जिले के अन्य सरकारी कार्यालयों की कार्यप्रणाली भी चर्चा में आ गई है।
जिले में कुछ वर्षों के दौरान विभिन्न विभागों के कई कर्मचारी रिश्वतखोरी के आरोप में पकड़े जा चुके हैं। तहसीलों में दाखिल-खारिज, पैमाइश, चकबंदी, आय, जाति और निवास प्रमाणपत्र सहित अन्य कार्यों में सुविधा शुल्क मांगने की शिकायतें समय-समय पर सामने आती रही हैं। कई मामलों में अधिकारियों ने जांच बैठाई, तो कुछ मामलों में सतर्कता एजेंसियों और पुलिस ने कार्रवाई भी की।
लोगों का कहना है कि भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए केवल गिरफ्तारी पर्याप्त नहीं है। कार्यालयों में पारदर्शी व्यवस्था, ऑनलाइन प्रक्रियाओं का विस्तार, शिकायतों का त्वरित निस्तारण और दोषियों के विरुद्ध समयबद्ध विभागीय कार्रवाई भी जरूरी है।
प्रशासन का कहना है कि भ्रष्टाचार के मामलों में शून्य सहनशीलता की नीति अपनाई जा रही है। किसी भी कर्मचारी के खिलाफ रिश्वत लेने की शिकायत मिलने पर निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी।
ट्रैप टीम ने ऐसे बिछाया था जाल ः जिगिना तप्पा सिरसी निवासी कन्हैयालाल ने 18 जुलाई को भ्रष्टाचार निवारण संगठन से शिकायत की थी कि उनकी जमीन के गाटा संख्या 295मी/0.025 को असंक्रमणीय से संक्रमणीय दर्ज कराने की प्रक्रिया में चकबंदी लेखपाल अभय कुमार सिंह ने 10 हजार रुपये की रिश्वत मांगी। शिकायत की गोपनीय जांच कराई गई, जिसमें आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए।
जांच के बाद 21 जुलाई को ट्रैप टीम गठित की गई। 22 जुलाई को शिकायतकर्ता से 500-500 रुपये के 20 नोट (कुल 10 हजार रुपये) फिनॉल्फ्थेलीन पाउडर लगाकर तैयार कराए गए और उन्हें आरोपी को देने के निर्देश दिए गए।
तय योजना के तहत ट्रैप टीम धनघटा तहसील परिसर पहुंची। शिकायतकर्ता ने आरोपी लेखपाल को रिश्वत की रकम दी, जिसे उसने अपने पैंट की जेब में रख लिया। इसके तुरंत बाद टीम ने उसे रंगे हाथ पकड़ लिया। बरामद नोटों के नंबर पहले से दर्ज नंबरों से मेल खा गए और रासायनिक परीक्षण में भी आरोपी के हाथ धुलने पर घोल गुलाबी हो गया। इसके बाद आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा-7 के तहत रिपाेर्ट दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया।