खुले में शौच करना एक सामाजिक अपराध है। इस तरह के कई जुमलों के जरिए निपनिया गांव के लोगों को अधिकारियों ने प्रेरित किया था। तो लोग पहले बातों पर कुछ खास ध्यान नहीं देते थे, लेकिन गांव की ही सब्जी बेचनी वाली हुबराजी के दिलों में ये बात उतर गईं। उसने सीमित संसाधनों में अपने घर में शौचालय बनवा लिया और उसे प्रयोग करती हैं। हुबराजी के जज्बे को देखकर बाकी लोग भी शौचालय निर्माण में आगे आए हैं।
सेमरियावां ब्लॉक के निपनिया गांव को खुले में ‘शौच मुक्त ग्राम योजना’ के तहत चुना गया है। एडीओ पंचायत ने बार-बार चौपाल लगा कर लोगों को प्रेरित किया। जिन लोगों ने अपने सीमित संसाधनों से शौचालय बनवाया है उनमें एक विधवा महिला हुबराजी की कहानी कुछ अलग है। हुबराजी ने बताया कि मैं सब्जी बेचकर आजीविका चलाती हूं। जब खुले में शौच से होने वाले नुकसान के बारे में जानकारी हुई तो मैंने ठान लिया कि अब हर हाल में शौचालय बनवाना है। सब्जी बेचकर जो कुछ रुपये एकत्रित किए थे वे शौचालय निर्माण के लिए काफी नहीं थे। तो अपनी बकरी बेचकर बाकी रकम का इंतजाम किया। अब घर का कोई भी सदस्य खुले में शौच करने नहीं जाता। हमें खुले में शौच के लिए जाना अपमानजनक लगता है।
शौचालय निर्माण के लिए करती हैं प्रेरित
हुबराजी गांव के लोगों को शौचालय निर्माण के लिए प्रेरित भी करती हैं। खुले में शौच मुक्त ग्राम योजना के तहत कुछ वालंटियर की जरूरत थी जोकि सुबह भोर में उठकर लोगों को मैदानों, खेतों में शौच करने वालों को इसका दुष्प्रभाव बताएं। हुबराजी ने स्वयं बढ़कर इस काम का बीड़ा उठाया। स्वयंसेवकों की टीम में सफात अहमद, अब्दुल मजीद, वसीक अहमद आदि शामिल हैं। हुबराजी भोर में उठती है और अन्य वालंटियर के साथ खुले में शौच करने वालों को समझाती है कि खुले में शौच न करें, घर में शौचालय बनवाएं, अगर मजबूरी में खुले में शौच करते हैं तो उस पर मिट्टी डाल दिया करें।
खुले में शौच मुक्त गांव बनेगा निपनिया
ग्राम प्रधान अबूबकर चौधरी ने बताया कि अब गांव के काफी लोग प्रेरित हुए हैं। अपने खर्च पर गांव के रामअजोर, अलीमुन्निसा, सालेहा खातून, बंसराज, अफसाना खातून, किसलावती, झिनकी समेत 14 लोगों ने शौचालय बनवा लिया है। उन्होंने बताया कि गांव में 118 घर शौचालय विहीन है, जो तेजी से लोग शौचालय बनवा रहे हैं।
शौचालय के लिए मिलेगा अनुदान
एडीओ पंचायत मोईनुद्दीन सिद्दीकी ने बताया कि ग्राम पंचायत का कोई भी व्यक्ति जिसके घर शौचालय नहीं है अगर वह अपने खर्च से निर्धारित मॉडल पर शौचालय बनवाता है तो स्वच्छ भारत मिशन के तहत उसे 12 हजार रुपये अनुदान के रूप में दिलवाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि निपनिया की हुबराजी जैसे लोग लोगों के लिए प्रेरणा हो सकते हैं।