- महिला थाने में हर माह दर्ज हो रहे औसतन तीन से चार मामले
- घरेलू कलह को भी दिया जा रहा दहेज उत्पीड़न का स्वरूप
संतकबीरनगर। पति-पत्नी के विवाद में मध्यस्थता (मीडिएशन) से भी बात नहीं बन पा रही है और दहेज उत्पीड़न का केस दर्ज करना पड़ रहा है। जनवरी से अब तक महिला थाने में 42 केस दर्ज हुए हैं। हर माह औसतन तीन से चार मामले दर्ज हो रहे हैं। घरेलू कलह को भी दहेज उत्पीड़न का स्वरूप दिया जा रहा है। एक मामले में न्यायालय में दोनों पक्षों ने सुलह कर ली। एक मामले में पुलिस ने कोर्ट में एफआर दाखिल कर दी है।
पुलिस दहेज उत्पीड़न जैसी सामाजिक बुराई को दूर करने के लिए ऑपरेशन जागृति और मिशन शक्ति चला रही है। साथ ही नुक्कड़ नाटक के माध्यम से लोगों को जागरूक किया जा रहा है। इतना सब होने के बाद भी दहेज उत्पीड़न के मामले बढ़ रहे हैं। आंकड़ें की बात करें तो सिर्फ महिला थाने में ही हर माह तीन से चार मामले दर्ज हो रहे हैं।
जानकारों का कहना है कि सामाजिक परिवेश में परिवर्तन के कारण इस प्रकार के मामले बढ़ रहे हैं। एकल परिवार की जीवन शैली के कारण भी लोगों में काफी बदलाव आया है। उन्हें कोई समझाने वाला नहीं है। लोगों की सहनशक्ति कम होती जा रही है। सिर्फ महिला थाने में ही इस वर्ष दहेज उत्पीड़न के 42 मामले हुए हैं। तीन मामलों की विवेचना चल रही है। पुलिस ने एक मामले में अंतिम रिपोर्ट दी है। जबकि एक मामले के पक्षकारों ने कोर्ट में सुलह समझौता कर लिया है। 37 मामलों में पुलिस ने न्यायालय में चार्जशीट दाखिल कर दी है।
मध्यस्थता विफल होने पर दर्ज होती है एफआईआर
दहेज उत्पीड़न का मामला आने पर पुलिस पहले मध्यस्थता यानी मीडिएशन कराने का प्रयास करती है। कभी -कभार मीडिएशन में ससुराल पक्ष के लोग नहीं आते हैं। उनको नोटिस दिया जाता है। इसके बाद भी न आने पर विवाहिता की तहरीर के आधार पर केस दर्ज किया जाता है। कुछ मामलों में दोनों पक्षों में काफी प्रयास के बाद भी सफलता नहीं मिलती है और पुलिस केस दर्जकर कानूनी कार्रवाई प्रक्रिया अपनाती है।
महिला थाने में दहेज उत्पीड़न के इस वर्ष 42 मामले दर्ज हुए हैं। 37 में विवेचना पूर्ण करके चार्जशीट न्यायालय में भेज दी गई है। एक मामले में एफआर लगाई गई है। एक में सुलह समझौता की सूचना मिली है। तीन मामलों की विवेचना अभी चल रही है। -अजीत चौहान, सीओ सिटी