धनघटा। तहसील क्षेत्र के गायघाट दक्षिणी गांव का नक्शा कई वर्ष से गायब है। नक्शा नहीं मिलने के कारण लोगों के खेतों की पैमाइश सहमति के आधार पर होती है। इतना ही नहीं यहां के खसरा-खतौनी भी जीर्णशीर्ण होकर तहसील में अभिलेखों के रखरखाव की व्यवस्था को बयां कर रहे हैं।
किसान बालेंद्र, लालचंद, रामशंकर, अमरजीत, रोशनलाल, रामलौट आदि का कहना है कि वर्ष 1997 में जब धनघटा तहसील का सृजन हुआ तो उसी समय गांव का नक्शा गायब हो गया। अब गांव से जुड़े जो अभिलेख बचे हैं, वह भी रखरखाव के अभाव में जीर्ण शीर्ण हो गए हैं। किसानों का कहना है कि जो खतौनी कंप्यूटर में फीड हो गई है, उसका इंतखाप तो निकल जा रहा है, लेकिन गांव का नक्शा गायब होने से बड़ी समस्या आ रही है।
गांव का नक्शा न होने से पैमाइश में बाधा आती है। जरूरत पड़ने पर ग्रामीण आपस में ही सहमति से जमीन की पैमाइश करा लेते हैं। ग्राम प्रधान बलिंदर उर्फ पप्पू ने बताया कि नक्शा समेत अन्य अभिलेखों को उपलब्ध कराने की मांग को लेकर तहसील के अधिकारियों को कई बार प्रार्थना पत्र दिया गया, लेकिन अभी तक अभिलेख उपलब्ध नहीं हो पाए। लोगों का कहना है कि धनघटा तहसील में अभिलेखों का रख रखाव सही ढंग से नहीं किया जाता है। इसके कारण कई महत्वपूर्ण अभिलेख गायब हैं।
इस संबंध में तहसीलदार रामजी का कहना है कि गायघाट दक्षिणी के नक्शा के लिए राजस्व परिषद को पत्र लिखा गया है। जल्द ही नक्शा उपलब्ध हो जाने की संभावना है।