- समय से रिपोर्ट न देने पर डॉक्टर को देना पड़ेगा स्पष्टीकरण
-जांच की प्रगति के संबंध में पीड़ित को पुलिस देगी कार्रवाई की जानकारी
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। नए कानून से लोगों को राहत मिल सकेगी। अब मेडिकल रिपोर्ट में देरी करने पर संबंधित डॉक्टर को स्पष्टीकरण देना होगा। वहीं, पुलिस को भी जांच की प्रगति से पीड़ित पक्ष को अवगत कराना होगा। गवाहों के लिए बनाई गई धारा से उन्हें सहूलियत मिलेगी।
पहले घटना होने के बाद पीड़ित पक्ष कई-कई दिनों तक थाने में चक्कर काटते थे। इसके बाद उसका मेडिकल परीक्षण कराया जाता था। अब धारा 184(1) के तहत अपराध की सूचना मिलने के 24 घंटे के अंदर ही पुलिस को पीड़ित पक्ष का मेडिकल कराना होगा। पीड़ित के मेडिकल कराने के बाद सात दिनों के भीतर संबंधित डॉक्टर को इसकी रिपोर्ट भेजने होगी। देरी होने पर डॉक्टर को स्पष्टीकरण भी देना होगा। अभी तक पुलिस रिपोर्ट दर्ज करने के बाद पीड़ित पक्ष के थाने पहुंचने या फिर उसके फोन पर पूछने पर ही उसे प्रगति की जानकारी देती थी। अब नए कानून की धारा 193(3)(ii)के तहत पीड़ित को केस की हर प्रगति के बारे में जानकारी देनी होगी।
चुनौतियां तो आएंगी पर अभ्यास से सब कुछ होगा आसान
नए कानून को लेकर अधिवक्ताओं में मतभेद नजर आ रहा है। नए और युवा अधिवक्ताओं ने कानून को आम आदमी के लिए खास बताया तो अधिकांश अधिवक्ताओं ने समय के साथ बदलते हुए परिवेश में कानून का बदलाव जरूरी होने के साथ ही लोकतंत्र में पुलिस के पास ज्यादा अधिकार देना गलत बताया। हालांकि अधिवक्ताओं का मानना है कि चुनौतियां तो आएंगी पर अभ्यास से सब कुछ आसान हो जाएगा। अधिवक्ता मोहम्मद इस्तियाक खान ने बताया कि तत्काल न्याय संहिता को रट पाना आसान नहीं है। कोई भी प्रार्थनापत्र तैयार होने के बाद कई बार चेक करना पड़ रहा है।
बोले अधिवक्ता
नए कानून में डिजिटल साक्ष्य जरूरी होने से कई काम आसान हो गया है। अन्य वरिष्ठ अधिवक्ताओं के मुताबकि वर्ष 1973 में कानून संसोधन के समय भी काफी असमंजस की स्थिति थी। हालांकि उस समय आंशिक संशोधन हुआ था। अब कई अहम धाराएं बदल गई हैं।
- रमेश तिवारी, वरिष्ठ अधिवक्ता
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नए आपराधिक कानून को जानने और समझने के लिए सभी अधिवक्ताओं को दोनों कानून में फर्क समझना पड़ेगा। नए कानून में भी मतभेद है। गलत शपथ पत्र देने पर कार्रवाई की जगह नहीं है।
- कोमल प्रसाद चौधरी, अधिवक्ता