सेमरियावां। माह-ए-रमजान का दूसरा अशरा मगफिरत का आज शाम को मुकम्मल हो जाएगा। तीसरा अशरा शुक्रवार को इफ्तार के बाद से शुरू हो जाएगा है। यह अशरा जहन्नुम से निजात दिलाता है। तीसरा अशरा रमजान के 21वें रोजा से शुरू हो कर ईद का चांद नजर आने तक जारी रहता है।
इस महीने के तीसरे अशरे में खुदा की इबादत करने से जहन्नुम से निजात मिलती है। इसमें खुदा की इबादत करके राजी करें और जहन्नुम से निजात के लिए अल्लाह से दुआ करते रहना चाहिए। रमजान के तीसरे अशरे को काफी महत्वपूर्ण माना गया है। यह रमजान के 21वें दिन से ईद के चांद नजर आने तक होता है। इस अशरा में ताक रातों में शब ए कद्र भी है। ऐसा माना जाता है कि यह रात आमतौर पर 21, 23, 25, 27 या 29वीं तारीख की रातों में से एक होती है। जिसमें जागकर अल्लाह की इबादत में मशगूल रहना चाहिए। सेमरियावां के हाफिज एजाज मुनीर नदवी ने बताया कि तीसरे अशरे (रमजान माह के आखिरी 10 दिन) में मुस्लिम समुदाय के लोग एतकाफ में बैठते हैं और दुनियावी चीजों से खुद को अलग करके सिर्फ दिन-रात अल्लाह की इबादत करते हैं। एतकाफ के लिए पुरुष मस्जिदों में पर्दा लगाकर बैठते हैं, जबकि महिलाएं घर के किसी कोने में पर्दा लगाकर बैठती हैं। हदीस पाक में बताया गया है कि रमजान में पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब भी एतकाफ में बैठ थे।
इस्लामिक मान्यता के मुताबिक, एतकाफ में बैठकर इबादत करने वालों के अल्लाह सभी गुनाह माफ कर देता है। उनकी हर जायज दुआ को पूरा करता है। रमजान के आखिर में एतकाफ में बैठने वालों पर अल्लाह की रहमत बरसती है। रमजान माह इस्लाम में सबसे पाक माना गया है। कुरान पाक में यहां तक कहा गया है कि एतकाफ में जिस मस्जिद या घर में कोई बैठता है, तो उस घर के आसपास के रहने वाले तक के गुनाह अल्लाह ताला माफ करत हैं।
मोहल्ला की मस्जिद में कोई शख्स एतेकाफ में बैठकर इबादत करता है, तो पूरे मोहल्ले के लोगों का गुनाह माफ हो जाता है। मोहल्ला की मस्जिद में किसी के एतेकाफ में न बैठने पर पूरे मोहल्ले के लोग गुनहगार होते हैं। लोग इस दौरान कुरान को पूरा करने की कोशिश करते हैं। नफ्ल नमाज़ और तहज्जुद: रात में नफिल व तहज्जुद नमाज़ पढ़ी जाती है।
तीसरा अशरा अल्लाह के करीब आने का सुनहरा मौका है। यह वह समय है जब मुसलमान अपने पिछले गुनाहों से निजात और भविष्य के लिए नेक रास्ते की दुआ करते हैं।