हेड से टेल तक पानी पहुंचाने में छूट रहे पसीने
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संतकबीरनगर। कभी सूखा तो कभी बाढ़ की मार झेल रहे अन्नदाता फिर संकट में हैं। रबी की बुआई के लिए खेत तैयार करने में जुटे किसानों को सिंचाई संसाधनों की बदहाली ने मुश्किल में डाल दिया है। किसान परेशान हैं, लेकिन नलकूप विभाग हाथ पर हाथ धरे बैठा है। न तो टूटी नालियां दुरूस्त हो सकी हैं और न ही खराब नलकूप। ऐसे में किसानों के माथे पर चिंता की लकीर दिख रही है। निजी संसाधनों से सिंचाई करने में किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
संतकबीरनगर की 638 ग्राम पंचायतों में सिंचाई व्यवस्था के लिए 465 नलकूप स्थापित हैं। इनके जरिए खेतों की सिंचाई का दावा नलकूप विभाग कर रहा है, लेकिन स्थिति यह है कि नलकूपों को जोड़ने वाली नालियां टूट गई हैं। कुछ स्थानों पर झाड़-झंखाड़ उग आए हैं। कई स्थानों पर नालियां का वजूद ही खत्म हो गया है। किसान रबी की बुआई की तैयारी में हैं तो उन्हें काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। विभागीय आंकड़ों को ही सही मानें तो आठ नलकूप खराब हैं। इनमें छह नलकूप यांत्रिक दोष से बेकार पड़े है। खलीलाबाद क्षेत्र के चकदही, सेमरियावां का रंजगनपुर, चंगेरा-मंगेरा, हैसर के समोगर प्रथम, बघौली के मेहनिया, मेंहदावल के बनकसिया शामिल हैं। दो नलकूप विद्युत दोष के कारण बेकार हैं। ऐसे में किसानों को निजी नलकूपों के सहारे रबी की तैयारी करने को मजबूर होना पड़ रहा है। किसान रविंद्र कुमार, महेश कुमार ने कहा कि नलकूपों की खराबी के चलते किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। मार्केट से डीजल खरीदकर पंपसेट के जरिए सिंचाई करने में किसानों को कई गुना अधिक खर्च करना पड़ रहा है। नलकूप विभाग के अधिशाषी अभियंता दीनानाथ विश्वकर्मा ने बताया कि नलकूपों को क्षमता के मुताबिक चलाने का प्रयास किया जा रहा है। विद्युत दोष के कारण जो नलकूप बंद है, उन्हें ठीक कराने के लिए विद्युत विभाग को लिखा गया है। जबकि यांत्रिक दोष से बेकार नलकूपों को ठीक कराया जा रहा है।