डीपीओ ने बताया कि जिले में आंगनबाड़ी केंद्रों पर नामांकित पांच वर्ष तक दो लाख सैतीस हजार बच्चों का आधार कार्ड बनाया जाना है। बच्चों के माता- पिता में से किसी एक का आधार कार्ड पहचान के लिए होना बेहद जरूरी है,अन्यथा की स्थिति में बच्चों का आधार कार्ड नहीं बन पाएगा।
अभी तक सिर्फ 5000 बच्चों का ही आधार कार्ड बन पाया है। आगे बताया कि चंगेरा- मंगेरा केंद्र पर आधार कार्ड बनाया जा रहा था। उनके जरिए जांच की गई तो केंद्र पर सिर्फ 15 बच्चे ही उपस्थित पाए गए है,जबकि वहां करीब 100 बच्चे नामांकित है।
इसकी सूचना मुख्य सेविका रागिनी गौड को पूर्व में दी गई थी वह केंद्र को आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को अवगत करा देंगी, इससे बच्चों की उपस्थित सुनिचित हो जाए और आधार कार्ड बनाने में सुविधा हो।
मुख्य सेविका ने सूचना नहीं दिया ,जिसकी वजह से कम बच्चे केंद्र पर उपस्थित हुए और सभी का आधार कार्ड नहीं बन पाया।
इसके अलावा टूर प्रोग्राम के मुताबिक मुख्य सेविका को सौरहा- सिघोरवा केंद्र पर होना चाहिए था, लेकिन उनकी जांच में उस केंद्र पर वह नहीं मिली।
जिसके कारण मुख्य सेविका का एक दिन का वेतन काटने का निर्देश दिया है। स्पष्टीकरण देकर जवाब मांगा है। यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो आगे की कार्रवाई प्रस्तावित की जाएगी।