हरियाणा सरकार के जरिए पंचायती राज अधिनियम में संशोधन करके प्रत्याशियों के लिए न्यूनतम शैक्षिक योग्यता, प्रत्याशी के घर शौचालय की अनिवार्यता व अन्य आवश्यक योग्यताएं निर्धारित की गई हैं। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार के इस कदम को उचित ठहराया है।
हरियाणा सरकार और शीर्ष अदालत के फैसले का लोगों ने स्वागत किया है। इस मुद्दे पर जब अमर उजाला ने कुछ लोगों से बातचीत किया तो उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का स्वागत किया और इसे यूपी में लागू करने की जरूरत जताई।
मोहम्मद आरिफ का कहना है कि पंचायतीराज अधिनियम के जरिए सत्ता का विकेंद्रीकरण किया गया है। पंचायतों को सशक्त बनाने केलिए पंचायतों के मुखिया की न्यूनतम शैक्षिक योग्यता का कदम सराहनीय कदम है।
शिक्षित व्यक्ति ही समाज में सकारात्मक बदलाव के बारे में बेहतर सोच रखेगा। इसलिए पंचायत के मुखिया केलिए शिक्षित होना बेहद जरूरी है।
अफजाल अहमद का कहना है कि हरियाणा सरकार ने पंचायत चुनाव में उम्मीदवार के लिये जो न्यूनतम शैक्षिक योग्यता निर्धारित किया है वह स्वागत योग्य कदम है।
सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के सरकार के इस कदम को सही ठहरा कर फैसले को ऐतिहासिक बना दिया है। शिक्षित व्यक्ति ही समाज को सही दिशा दे सकता है और ग्राम पंचायत के मुखिया की जिम्मेदारी बखूबी निभा सकता है।