मरीज की हालत गंभीर है ‘ट्रायज’ में होगा तय
संतकबीरनगर। जिला अस्पताल और सीएचसी में गर्भवतियों के इलाज की प्राथमिकता तय करने के लिए अब ट्रायज एरिया (गंभीर रोगियों को पहले चिकित्सा देने की विधि) बनाया जाएगा। यहां जांच के बाद ही यह होगा कि मरीज की हालत गंभीर है या नहीं। जिस मरीज की हालत गंभीर होगी उसका इलाज प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा। भले ही उसका पर्ची पर अंतिम नंबर लिखा हो। स्वास्थ्य विभाग के इस पहल से अब गंभीर मरीजों के इलाज के लिए तीमारदारों को परेशानी नहीं होगी। साथ ही चिकित्सकों के साथ कहासुनी की नौबत से बचा जा सकेगा।
उत्तर प्रदेश टेक्निकल सपोर्ट यूनिट (यूपीटीएसयू) के डिस्ट्रिक टेक्निकल स्पेशलिस्ट डॉ जगदीश ने बताया कि अस्पताल में पर्ची बनवाने के बाद नंबर लगाया जाता था। चिकित्सक उसी के आधार पर मरीजों की जांच करते थे। इसके चलते कभी-कभी गंभीर मरीजों का नंबर आते-आते उसकी हालत और खराब हो जाती थी। हालात ऐसे बन जाते थे कि तीमारदारों से चिकित्सकों की कहासुनी के बाद मारपीट की नौबत हो जाती है। अब ऐसे हालातों से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने यह कदम उठाया है। इसके तहत अस्पतालों में ट्रायज एरिया (गंभीर रोगियों को पहले चिकित्सा देने की विधि) बनाया जाएगा। यहां ऐसे मरीजों की प्राथमिक जांच की जाएगी। गंभीर हालत की पुष्टि होने पर उसका सबसे पहले इलाज किया जाएगा। डॉक्टर जगदीश ने बताया कि ट्रायज कार्नर के महत्व को समझते हुए जिला अस्पताल में यह एरिया बना दिया गया है। जबकि सीएचसी सेमरियावां में इसकी कवायद चल रही है। अन्य ब्लॉकस्तरीय पीएचसी और सीएचसी पर ट्रायज एरिया बनाने की व्यवस्था की जा रही है।
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इस एरिया में होगी यह व्यवस्था
ट्रायज एरिया (गंभीर रोगियों को पहले चिकित्सा देने की विधि) अस्पताल के महिला विंग में स्थापित होगा। इस कार्नर में एक जांच टेबल, बैठने के लिए एक टेबल, महिलाओं के जांच की किट, ब्लड प्रेशर मशीन होगी। यह पूरी तरह से केबिन की तरह से होगा। ताकि गर्भवतियों की प्राथमिक जांच त्वरित रुप से किया जा सके।
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जिला अस्पताल में बना एरिया
सीएमओ डॉ हरगोविंद सिंह ने बताया कि जिला अस्प्ताल में ट्रायज एरिया विकसित कर दिया गया है। शेष ब्लॉक स्तरीय प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में यह व्यवस्था की जा रही है। ताकि अस्पताल में आने वाली गर्भवती महिलाओं में सीरियस महिलाओं का इलाज पहले हो सके।