संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। जिला होम्योपैथिक अस्पताल के पास अपना भवन नहीं है। अस्पताल किराए के कमरे में चल रहा है। साथ ही इस अस्पताल का प्रभार भी धौरहरा की चिकित्सक के ऊपर है। दूसरी तरफ धौराहरा का अस्पताल चिकित्सक विहीन हो गया है। एक कमरे में संचालित अस्पताल में मरीजों के बैठने के लिए जगह नहीं है। मरीज को दरवाजे पर खड़ा करके बीमारी पूछकर दवा दी जाती है।
यहां पर प्रतिदिन करीब 70 मरीज इलाज के लिए आते हैं। वह बाहर खड़े रहते हैं और अपनी बारी का इंतजार करते हैं। यही हाल राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सालय का भी है। वह भी एक कमरे में संचालित होता है। उसके छत का प्लास्टर भी टूट कर गिर रहा है, जिससे हर समय कमरे में खतरा बना रहता है।
सीएचसी खलीलाबाद के परिसर में एक पुराने भवन में जिला होम्योपैथिक अस्पताल और राजकीय होम्योपैथिक अस्पताल संचालित किया जा रहा है। भवन के दो छोटे कमरों में दवा भी रखी गई है और चिकित्सक भी बैठते हैं। साथ ही कबाड़ भी रखा गया है।
कमरे के एक कोने में चिकित्सक बैठते हैं और मरीज दरवाजे पर खड़ा रहता है। मरीज कमरे के बाहर से ही बीमारी बताता है तो उसी आधार पर डॉक्टर दवा लिखते हैं। दूसरे कमरे में राजकीय होम्योपैथिक अस्पताल चलता है। जिला होम्योपैथिक अस्पताल में एक फार्मासिस्ट दो अनुचर की तैनाती है।
यहां पर चिकित्सक का पद खाली है। धौरहरा होम्योपैथिक अस्पताल की डॉ. शिक्षा जुल्का को ही यहां संबद्ध किया गया है। वहीं प्रभारी जिला होम्योपैथिक अधिकारी भी हैं और मरीज देखती हैं। वह नियमित अस्पताल पहुंच कर करीब प्रतिदिन 70 मरीजों के स्वास्थ्य की जांच के साथ दवा लिखती हैं। एक कमरे में ही वह मरीज देखती हैं। उसी कमरे में दवा भी मिलती है।