संतकबीरनगर। ठंड बढ़ने के साथ ही सर्दी और खांसी की शिकायत आम हो गई है, लेकिन चिकित्सक इसे हल्के में नहीं लेने की सलाह दे रहे हैं। उनका कहना है कि इसके पीछे निमोनिया जैसा गंभीर खतरा भी छिपा हो सकता है। जिले में बच्चे और बुजुर्ग तेजी से इसकी चपेट में आ रहे हैं। जिला अस्पताल में सर्दी-खांसी की शिकायत लेकर आने वाले 25 से 30 मरीजों में निमोनिया की पुष्टि हो रही है। कई मरीजों में मुंह के स्वाद में बदलाव की समस्या भी सामने आ रही है।
जिले में बीते कई दिनों से पड़ रही कड़ाके की ठंड का सीधा असर लोगों की सेहत पर पड़ रहा है। सबसे ज्यादा असर बच्चों और बुजुर्गों पर देखने को मिल रहा है। बच्चे और बुजुर्ग मौसमी बीमारियों की चपेट में अधिक आ रहे हैं। जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ कुमार सिद्धार्थ का कहना है कि इन आयु वर्गों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है, जिसके कारण संक्रमण तेजी से शरीर में फैलता है।
चिकित्सकों के मुताबिक निमोनिया फेफड़ों का एक गंभीर संक्रमण है, जो बैक्टीरिया या वायरस के कारण होता है। यदि समय रहते इसका इलाज न कराया जाए तो मरीज की हालत गंभीर हो सकती है और जान का खतरा भी बढ़ जाता है। बच्चों में निमोनिया के लक्षणों में दूध नहीं पानी या भोजन नहीं करना, सुस्ती, तेज सांस चलना और बुखार शामिल हैं। वहीं बुजुर्गों में अत्यधिक कमजोरी, सांस फूलना और लगातार खांसी को गंभीर संकेत माना जाता है। सर्दी-खांसी के साथ बुखार या सांस लेने में परेशानी होने पर तुरंत चिकित्सकीय जांच कराएं और स्वयं दवा लेने से बचें। समय पर इलाज और सावधानी बरतने से ही निमोनिया जैसी गंभीर बीमारी से बचाव संभव है।
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लक्षण
- बच्चों का दूध या भोजन न करना
- सुस्ती या ज्यादा रोना
- तेज सांस चलना या सांस फूलना
- अचानक कमजोरी व सांस फूलना
- भ्रम या चक्कर जैसा महसूस होना
- सीने में दर्द, खासकर सांस लेते या खांसते समय
- लगातार खांसी (कभी-कभी बलगम के साथ)
- मुंह का स्वाद बदलना
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बचाव के उपाय
- ठंड से बचाव करें और मौसम के अनुसार गर्म कपड़े पहनें
- सर्दी-खांसी या बुखार को हल्के में न लें, समय पर जांच कराएं
- बच्चों और बुजुर्गों को धूल-धुएं व भीड़भाड़ वाली जगहों से दूर रखें
- नियमित रूप से हाथ धोएं और साफ-सफाई का ध्यान रखें
- खांसते या छींकते समय मुंह-नाक ढकें
- संतुलित और पौष्टिक आहार लें, जिससे रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत रहे
- पर्याप्त आराम और नींद लें
- धूम्रपान से दूरी बनाए रखें और बच्चों को धुएं के संपर्क में न आने दें
- चिकित्सक की सलाह से जरूरी टीकाकरण अवश्य कराएं
- बिना डॉक्टर की सलाह के दवाएं न लें