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Sant Kabir Nagar News: मलमास खत्म होते ही सहालग की रौनक

Thu, 02 Jul 2026 12:16 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
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धर्मसिंहवा। मलमास समाप्त होने के साथ ही क्षेत्र में एक बार फिर शादी-विवाह का सीजन शुरू हो गया है। 15 जुलाई तक मांगलिक कार्यक्रमों की भरमार रहने से बाजारों में बर्तन और जेवर की खरीदारी बढ़ गई है। हालांकि, सोना-चांदी और स्टील समेत अन्य धातुओं के दाम बढ़ने से लोगों का बजट गड़बड़ा गया है। ऐसे में अधिकतर परिवार जरूरत और सामर्थ्य के अनुसार कम मात्रा में सामान खरीदकर रस्मों की औपचारिकता निभाने को मजबूर हैं।
क्षेत्र के बाजारों में इन दिनों सुबह से देर शाम तक खरीदारों की आवाजाही बनी है। शादी से जुड़े सामानों की दुकानों पर भीड़ तो दिखाई दे रही है, लेकिन महंगाई के कारण खरीदारी पहले जैसी नहीं हो रही है। लोग पहले जहां अधिक संख्या में बर्तन और जेवर खरीदते थे, वहीं अब बजट के हिसाब से कम सामान लेकर काम चला रहे हैं।
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धर्मसिंहवा बाजार में बर्तन खरीदने आए मनोज ने बताया कि उन्हें रिश्तेदारी में एक शादी समारोह के पांव पूजन कार्यक्रम में शामिल होना है। पहले वह पांच बर्तन खरीदने की योजना बनाकर आए थे, लेकिन कीमतें बढ़ने के कारण अब तीन बर्तन लेकर ही संतोष करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि लगातार बढ़ती महंगाई का सीधा असर घरेलू बजट पर पड़ रहा है।
इसी तरह संतोष वर्मा अपनी मां के साथ बेटी की शादी के लिए चांदी की पायल खरीदने पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि चांदी के बढ़े दाम के कारण पहले की तरह मनचाहा जेवर खरीद पाना संभव नहीं हो सका। बजट सीमित होने के कारण पुराने डिजाइन की तुलना कर एक ही पायल खरीदनी पड़ी।
व्यापारियों का कहना है कि महंगाई का असर कारोबार पर भी साफ दिखाई दे रहा है। बर्तन एवं सर्राफा व्यवसायी उमेश वर्मा ने बताया कि कच्चे माल की कीमतों में लगातार वृद्धि होने से तैयार सामान महंगा हो गया है। इसके चलते ग्राहक पहले की तुलना में कम खरीदारी कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि ग्राहकों की आर्थिक स्थिति और जरूरत को देखते हुए उन्हें बजट के अनुरूप सामान उपलब्ध कराया जा रहा है, ताकि उनकी रस्म आसानी से पूरी हो सकें।
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व्यापारियों के अनुसार सहालग शुरू होने से बाजार में ग्राहकों की संख्या तो बढ़ी है, लेकिन बिक्री का स्तर पिछले वर्षों की तुलना में अपेक्षाकृत कम है। लोगों की प्राथमिकता अब दिखावे की बजाय आवश्यक खरीदारी तक सीमित होती जा रही है। महंगाई के बीच परिवार अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने के लिए खर्च में कटौती कर संतुलन बनाने का प्रयास कर रहे हैं।
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