- 1515 ईस्वीं में मगहर में हुआ था संत सम्मेलन, बाबा गोरखनाथ ने लाकर दी थी कबीरदास को खिचड़ी
संतकबीरनगर। मगहर में मकर संक्रांति के पावन पर्व पर चढ़ने वाली खिचड़ी पर्व की महत्ता गोरखपुर के गुरु गोरखनाथ की परंपरा से जुड़ी हुई है। मगहर में सन 1515 ई में आयोजित होने वाले संत सम्मेलन के बाद आए गुरु गोरखनाथ ने कबीरदास जी को खिचड़ी भेंट की थी। इसी खिचड़ी का प्रसाद सभी संतों और उपस्थित आम जनता ने किया। इसके तीन वर्ष बाद जब कबीर का निर्वाण हो गया, तभी से मकर संक्रांति के अवसर पर खिचड़ी चढ़ाने की परम्परा चली आ रही है।
कबीर चौरा के महंत विचारदास बताते हैं कि वर्ष 1515 में मगहर क्षेत्र में अकाल पड़ा हुआ था। अकाल से जूझ रहे लोगों को राहत दिलाने के लिए कबीर निर्वाण स्थली से दो किमी की दूरी पर स्थित कबीर धूनी पर संत सम्मेलन हुआ। इस सम्मेलन में कबीरदास के अतिरिक्त गुरु गोरखनाथ, संत रविदास, वैष्णव सम्प्रदाय के केशवदास, गुरु नानक तथा सूफी बाबा शामिल हुए। संत सम्मेलन के बाद वहां पर गुरु गोरखनाथ की कृपा से बहुत तेज बारिश हुई। इस बारिश के बाद वहां पर एक विशाल भंडारा आयोजित किया गया। उस भंडारे के लिए खिचड़ी के रुप में चावल गुरू गोरखनाथ के यहां से आया था। इसी भंडारे के दौरान कबीरदास जी ने आमी नदी जो निर्वाण स्थली से दूर बहती थी, उसे चल अमिया... कहकर आवाज दी तो जो आमी नदी सीधी बहती थी, वह दक्षिणमुखी होकर कबीर निर्वाण स्थली के बगल में आ गई।
महंत विचार दास बताते हैं कि संत सम्मेलन के स्थान पर आज भी कबीर धूनी, गोरख तलैया, नानक कुंआ आदि बना हुआ है। इस सम्मेलन के दोतीन साल बाद कबीरदास जी की मौत हो गयी, तब उस क्षेत्र के लोगों के साथ ही गोरखपुर व अन्य स्थानों के लोग आकर खिचड़ी चढ़ाने लगे। इसी के बाद से यहां पर मेले का आयोजन होने लगा जो आज तक निरन्तर चलता आ रहा है।