हरिहरपुर। नगर पंचायत हरिहरपुर में श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन आचार्य देवव्रत ने कृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन कर श्रद्धालुओं को भाव विभोर कर दिया। कहा कि भगवान श्रीकृष्ण गोपियों के घर उनके छीके से उतारकर माखन खा लेते हैं और साथी ग्वाल सखाओं को भी माखन खिला देते हैं। जब गोपियां माता यशोदा से श्रीकृष्ण की शिकायत करने पहुंचती हैं तो कृष्ण के रूप और प्रेम के वशीभूत अपनी सुधबुध खो बैठती हैं और शिकायत की जगह प्रशंसा करने लगती हैं।
उन्होंने कहा कि एकबार गोपियों ने भगवान कृष्ण को माखन चुराते हुए पकड़ लिया। सभी गोपियां इकट्ठा हो गई और भगवान को माता यशोदा के पास लेकर पहुंचती हैं और माखन चोरी होने की बात बताती हैं। कथा में आगे कहा कि माता यशोदा भगवान की तीन तरह की भक्ति करती हैं, जिसमें मनसा, वाचा और कर्मणा निहित है। उन्होंने कहा कि बच्चों को संस्कार के साथ ही शास्त्र और शस्त्र की विद्या सिखाने की जरूरत है। उन्होंने बदलते सामाजिक और पारिवारिक परिवेश पर भी श्रोताओं का ध्यान आकृष्ट किया। इतिहास के पन्नों को पलटते हुए मैकाले की शिक्षा नीति पर भी प्रकाश डाला और बताया कि कैसे गुरुकुल जैसी संस्थाएं बंद हुई।