सेमरियावां। देश को अंग्रेजी हुकूमत से आजाद कराने के लिए सेमरियावां निवासी मुहिब्बुल्लाह ने अपना जीवन संघर्ष और बलिदान के लिए समर्पित कर दिया। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान अंग्रेजी शासन के खिलाफ उनकी सक्रियता से अंग्रेज परेशान रहे।
गिरफ्तारी के बाद बस्ती जेल में उन्होंने अंग्रेजों के सामने झुकने की बजाय प्राण त्याग दिए। आज भी क्षेत्र के बुजुर्ग उनकी कुर्बानी को याद करते हैं। मौलाना फुजैल नदवी बताते हैं कि शहीद मुहिब्बुल्लाह उनके नाना के दादा थे। वर्ष 1905 में दारुल उलूम देवबंद से शेखुल हिंद मौलाना महमूद उल हसन के नेतृत्व में रेशमी रूमाल तहरीक का संचालन किया गया।
अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन की योजनाओं और संदेशों को रेशमी कपड़े पर लिखकर गुप्त रूप से एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाया जाता था। इस आंदोलन का मुहिब्बुल्लाह पर भी गहरा प्रभाव पड़ा। इसके बाद उन्होंने सेमरियावां और आसपास के क्षेत्रों में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ लोगों को जागरूक करना शुरू किया।
जगह-जगह आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने से अंग्रेज अफसरों की नजर उन पर पड़ी। आंदोलन से जुड़े कई क्रांतिकारियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जाने लगा।