संतकबीरनगर। एनडीपीएस के मामले में जिंदा अभियुक्त को मृत बनाने की बात पुलिस विभाग के साथ ही साथ न्यायालय और आम जनता के बीच चर्चाओं का केंद्र रही है। इसमें एनडीपीएस जैसे गंभीर मामले के अभियुक्त के चार महीने पहले ही मर जाने की रिपोर्ट थाना स्तर से न्यायालय में पेश कर दी गई। वह भी उस स्थिति में जब अभियुक्त के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी हुआ था।
इस गंभीर मामले को लेकर जिले की पुलिस विभाग के आला अधिकारी काफी गंभीर दिख रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि इतनी बड़ी गलती कैसे हुई, यह घोर लापरवाही का द्योतक है। यह मामला न्यायालय में भी चर्चाओं का केंद्र बना रहा। अधिवक्ता इसे थाने की बड़ी लापरवाही मान रहे थे। अधिवक्ताओं का कहना था कि जब भी किसी व्यक्ति के मृत्यु की आख्या पेश की जाती है, उसमें काफी गंभीरता बरती जाती है। न्यायालय मानता है कि थाने ने पूरी गंभीरता के साथ इस बात की तस्दीक की है कि संबंधित व्यक्ति की मौत हो गई है। इसी आख्या के आधार पर आरोपियों के नाम केस से निकाल दिए जाते हैं। साथ ही उसपर चलाए जा रहे मुकदमे को बंद कर दिया जाता है।
यह पूरी तरह से न्यायालय की आंख में धूल झोकने के साथ न्यायालय को भ्रमित करने का मामला है। इस तरह की आख्या देने के पीछे मंशा आखिर क्या थी? अगर इसी तरह से आख्या न्यायालय में प्रेषित हो जाएं तो सभी अभियुक्त छूट जाएंगे। वहीं पुलिस महकमे में अंदरखाने चर्चाओं का बाजार गर्म है। सभी का यही कहना था कि जब अभियुक्त खुद कह रहा है कि हम जिंदा हैं। तो फिर इस तरह की आख्या देने के पीछे आखिर मकसद क्या था? वह भी पुलिस विभाग के एक जिम्मेदार अधिकारी के द्वारा। फिलहाल गेंद अब न्यायालय के पाले में है और सभी की निगाहें पेशी की तारीख 13 अगस्त पर टिकी हुई हैं।