संवाद न्यूज एजेंसी
सेमरियावां। ब्लाॅक के सैथवलिया-सुटेहरा गांव में मनरेगा के तहत विकास कार्यों में अनियमितता की शिकायत पर तकनीकी सलाहकार समिति (टीएसी) ने जांच की थी, जिसमें 10 लाख 88 हजार रुपये के सरकारी धन के गबन की पुष्टि हुई, लेकिन प्रधान और ग्राम सचिव पर कार्रवाई नहीं हो सकी है, जबकि जांच के दस माह बीतने को हैं। अभी तक धन की वसूली और कार्रवाई न होने पर शिकायतकर्ता ने जिलाधिकारी को पत्र देकर कार्रवाई की मांग की है।
गांव के हिफजुर्रहमान ने डीएम को दिए पत्र में कहा है कि मंडलायुक्त के निर्देशानुसार 10 जनवरी 2024 को सैथवलियां-सुटेहरा गांव में मनरेगा के तहत विकास कार्यों में अनियमितता की शिकायत पर मंडलीय तकनीकी सलाहकार समिति की टीम ने जांच की।
जांच टीम ने 10 लाख 88 हजार 86 रुपये के गबन की पुष्टि की थी। शिकायकर्ता का आरोप है जांच में जो लोग शामिल हैं वह लोग कूटरचित तरीके से मंडलायुक्त की कार्रवाई से बचने के लिए 24 जनवरी 2024 को एक जांच कमेटी गठित कराकर कार्रवाई से बचती आ रहीं है। अधिकारी हर बार दूसरी कमेटी का हवाला देकर कार्रवाई से बच रहे हैं। शिकायतकर्ता का कहना है कि कार्रवाई के लिए कई बार दो बार जनसुनवाई के माध्यम से भी शिकायत की गई लेकिन अधिकारी आरोपी को बचा रहे हैं। शिकायतकर्ता का कहना है कि अगर कार्रवाई नहीं होती है तो वह न्यायालय की शरण लेंगे।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि दस माह बीत जाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है और सरकारी धन के गबन की वसूली नहीं की जा रही है। इस संबंध में डीएम महेंद्र सिंह तंवर ने बताया कि मामले के बारे में पता कराएंगे कि किस वजह से कार्रवाई नहीं हुई है।