जिला अस्पताल की ओपीडी में मरीज के कान की जांच करते चिकित्सक। संवाद
संतकबीरनगर। हेडफोन और मोबाइल फोन के अधिक इस्तेमाल से कम उम्र में ही लोग टिनिटस के शिकार हो रहे हैं। जिला अस्पताल के ओपीडी के ईएनटी कक्ष में रोजाना इस समस्या से पीड़ित करीब तीन से चार मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। चिकित्सक इन मरीजों को दवा के साथ हेडफोन का इस्तेमाल न करने और हैंड फ्री करके मोबाइल फोन का प्रयोग करने की सलाह दे रहे हैं।
वर्तमान में मोबाइल फोन जिंदगी का अहम हिस्सा बन गया है। युवा मोबाइल में हेडफोन ज्यादा इस्तेमाल करते हैं। यही कारण है कि कम उम्र में ही वह टिनिटस नाम की बीमारी का शिकार हो रहे हैं। इस बीमारी में कान में घंटी बजने जैसी आवाज आती है। यह आवाज बाहरी नहीं होती है। अधिकांशतः यह समस्या अस्थायी होती है। कुछ मामलों में यह समस्या लंबे समय तक रह सकती है। इससे मनुष्य के सुनने की क्षमता भी प्रभावित हो जाती है।
जिला अस्पताल के नाक कान गला रोग विशेषज्ञ डाॅ. एमके सिंह ने बताया कि लगातार तेज आवाज के संपर्क में रहने से कान में घंटी जैसी आवाज आना टिनिटस की परेशानी है। इससे मरीज की सुनने की क्षमता भी प्रभावित हो जाती है। इस परेशानी से बचने के लिए तेज आवाज के संपर्क में रहने से बचना चाहिए।
हैंड फ्री करके मोबाइल फोन का प्रयोग करना चाहिए। परेशानी होने पर चिकित्सक का परामर्श ले और दवा कराए। उन्होंने बताया कि टिनिटस दो प्रकार का होता है। पहला सब्जेक्टिव टिनिटस, जिसे मरीज सुन सकता है। दूसरा ऑब्जेक्टिव टिनिटस, जिसे चिकित्सक परीक्षण के बाद ही बता पाते हैं।