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अब विद्यार्थियों को खुद सिलवानी होगी ड्रेस

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अब विद्यार्थियों को खुद सिलवानी होगी ड्रेस
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खाते में जाएगी रकम, प्रति विद्यार्थी 300 रुपये प्रति यूनिफार्म दिया जाएगा
विद्यार्थियों के अभिभावकों के खाते में भेजी जाएगी रकम, विभाग खाता नंबर जुटाने में जुटा
पुनीत कुमार मिश्र
संतकबीरनगर। परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को अब स्कूल से यूनिफार्म नहीं मिलेगी। उसकी जगह उनके अभिभावकों के खाते में यूनिफार्म की रकम भेजी जाएगी, जिससे वे खुद यूनिफार्म सिलवाएंगे। विभाग विद्यार्थियों के अभिभावकों के खाता नंबर आदि को वेबसाइट पर अपलोड करने की तैैयारी शुरू कर दी है।
जिले में 805 प्राथमिक विद्यालय, 192 उच्च प्राथमिक विद्यालय और 250 कंपोजिट विद्यालय हैं। इन विद्यालयों में एक लाख 40 हजार विद्यार्थी विद्यार्थी नामांकित हैं। इसमें एक लाख 13 हजार विद्यार्थी प्राथमिक विद्यालय में हैं और 27 हजार उच्च प्राथमिक विद्यालय में हैं। शासन की तरफ से विद्यार्थियों को हर साल दो सेट यूनिफार्म निशुल्क दी जाती है। 300 रुपये प्रति यूनिफार्म की दर से दो यूनिफार्म पर 600 रुपये खर्च होता है। शासन ने इस बार यूनिफार्म वितरण में बदलाव कर दिया है। इस बार बेसिक शिक्षा विभाग यूनिफार्म की खरीद नहीं करेगा। क्योंकि विद्यार्थियों के यूनिफार्म के नाप में काफी अंतर आता था और यूनिफार्म विद्यार्थी को फिट नहीं बैठता था। अब शासन ने यूनिफार्म का वितरण न करके विद्यार्थियों के अभिभावकों के खाते में रकम भेजने का आदेश जारी किया है। हर विद्यार्थी के अभिभावक के खाते में दो सेट यूनिफार्म के 600 रुपये भेजे जाएंगे। इसके लिए बेसिक शिक्षा विभाग ने अभिभावकों का खाता नंबर प्रेरणा पोर्टल पर अपलोड करने की कार्रवाई शुरू कर दी है। खाता नंबर अपलोड करने को लेकर ब्लॉकों में तैनात कंप्यूटर ऑपरेटर को प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे पूर्व सहायक एवं वित्त लेखाधिकारी और डीसी सामुदायिक सहभागिता को भी प्रशिक्षण मिलेगा। इनका प्रशिक्षण 15 जून को लखनऊ में होगा ताकि खाता नंबर सही तरीके से अंकित हो सके और विद्यार्थियों के अभिभावकों के खाते में रकम भेजी जा सके। (संवाद)
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कोट
यूनिफार्म की रकम विद्यार्थियों के अभिभावकों के खाते में जानी है। अभिभावकों के खाते प्रेरणा पोर्टल पर पहले से अपलोड हैं। जो बचे हैं उनका खाता भी अपलोड कर दिया जाएगा। पीएफएमएस डीबीटी सिस्टम से अभिभावकों के खाते में रकम जाएगी। ताकि वे बच्चों की ड्रेस सिलवा सकें।
-सत्येंद्र कुमार सिंह, बीएसए
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