- घाटे का फसल बनती नजर आ रही धान की खेती
- किसानों की उम्मीदों पर फिर रहा पानी
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। करीब एक सप्ताह से अच्छी बारिश न होने से किसानों की चिंता फिर बढ़ गई है। किसानों को फसल बचाने के लिए जद्दोजहद करना पड़ रहा है। यदि बारिश नहीं हुई तो किसानों की उम्मीदों पर पानी फिर जाएगा।
कृषि विभाग के मुताबिक प्रति हेक्टेयर धान की फसल में नर्सरी डालने से लेकर कटाई और मड़ाई तक करीब 20 हजार रुपये की लागत आती है। इधर बारिश नहीं होने से किसानों को हर हफ्ते सिंचाई करनी पड़ रही है, जिससे प्रति सप्ताह 1500 रुपये सिंचाई पर खर्च होने का अनुमान है। ऐसे में किसानों के लिए धान की फसल घाटे की फसल बनती नजर आ रही हैं। फिलहाल किसान बारिश होने की उम्मीद में फसल को बचाने की जद्दोजहद कर रहे हैं। महंगे डीजल खरीदकर किसान फसल की सिंचाई इस उम्मीद से कर रहे हैं कि बारिश होगी तो लगाई गई पूंजी बच जाएगी।
किसान राधेश्याम चौरसिया व राम फल आदि ने कहा कि कई दिनों से अच्छी बारिश नहीं हुई है। जिससे फसल सूखने लगी है। मजबूरी में महंगा डीजल खरीद कर सिंचाई करनी पड़ रही है। एक हेक्टयर सिंचाई में करीब 1500 रुपये खर्च आ रहा है और प्रति सप्ताह सिंचाई करनी मजबूरी बनी हुई है। ऐसे में फसल पर लागत काफी बढ़ गई है। किसानों ने कहा कि यदि बारिश नहीं हुई तो इस बार धान की खेती से नुकसान उठाना पड़ेगा।
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अभी बारिश की उम्मीद बनी हुई है। ऐसे में किसानों को चाहिए कि शाम के समय खेतों की सिंचाई करें, जिससे खेतों में नमी ज्यादा समय तक बनी रहेगी।
पीसी विश्वकर्मा- जिला कृषि अधिकारी