आमी बचाओ अभियान के तहत मंच के अध्यक्ष विश्वविजय सिंह के नेतृत्व में 15 दिनों तक चले जल यात्रा के समापन अवसर पर कबीर चौरा परिसर में आमी नदी के तट पर एक गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें मुख्य अतिथि जल पुरुष डॉक्टर राजेंद्र सिंह ने कहा कि नदी व समाज का अटूट संबंध होता है।
समाज को चाहिए कि वह नदी को गंदा न करें। संत की जिम्मेदारी बनती है कि समाज और राज्य को नदी के प्रति उत्तरदायित्व का एहसास कराएं। परंतु राज्य उद्योगपतियों को संरक्षण दे रहे हैं। अभी बदलाव की हवा नहीं चली है, जिसे चलाने की जरूरत है। एनएसएस के लोगों से अनुरोध करते हुए कहा कि आगामी पांच वर्ष आमी नदी के तट पर कैंप लगाकर लोगों को जागरूक करने का कार्य करें।
आमी नदी का एक ऐसा संगठन बने जिसमें सभी धर्मों के धर्मगुरु संगठित हो। जिससे आध्यात्म की क्रांति लाई जा सके। आगे कहा कि विश्व जल शांति यात्रा में वे आमी नदी का मुद्दा भी शामिल करेंगे। इसके लिए केंद्र व राज्य सरकार के सामने आमी नदी के प्रदूषण को लेकर बात रखेंगे।
मंच के अध्यक्ष विश्व विजय सिंह ने कहा कि जब तक गांव की गंगा नहीं बचेगी तब तक देश की गंगा को नहीं बचाया जा सकता। इसके लिए शांतिपूवर्क कार्य करने की जरूरत है। अगर इससे कार्य नहीं बनता है तो क्रांति का रास्ता अख्तियार करना पड़ेगा।
गंदे पानी को आमी नदी में बहने से रोकने के लिए हमारी और आप की सतत निगरानी की जरूरत है। डॉक्टर अजय शुक्ला ने कहा कि समाज को जागरूक करने की जरूरत है। नदी का प्रदूषण स्वयं समाप्त हो जाएगा। अध्यक्षता महंत विचार दास ने किया।
इनके अलावा डॉक्टर धनंजय सिंह, जिया अंसारी, राजेश वर्मा, डॉक्टर हरिराम शास्त्री,ने भी अपने विचार रखें। अंत में आमी नदी की आरती की गई। इस अवसर पर डॉक्टर राकेश सिंह, रामलखन दास, केशव दास, अरविंद दास, डॉक्टर एके पांडेय, रामकुमार वर्मा, संदीप, चंद्रजीत, सुभाष पासवान, सिद्धनाथ निषाद, विजय तिवारी, रवि प्रकाश पांडेय, मुकेश यादव, नागेंद्र पासवान सहित तमाम लोग उपस्थित रहे।