राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के आह्वान पर मंगलवार को जिले के सभी विभागों के कर्मचारियों ने कलमबंद हड़ताल की। इस दौरान कर्मचारी अपने-अपने कार्यालय पहुंचे और हस्ताक्षर बनाने के बाद हड़ताल पर चले गए।
कर्मचारी सातवें वेतन आयोग की रिपोर्ट को कर्मचारी विरोधी बताते हुए आंदोलित हैं। हड़ताल के कारण कार्यालयों में सन्नाटा पसरा रहा।
दो दिवसीय कमलबंद हड़ताल के पहले दिन मंगलवार को उत्तर प्रदेश डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ के बैनर तले कर्मचारियों ने प्रांतीय खंड लोक निर्माण विभाग के कार्यालय पर कार्य बहिष्कार करते हुए धरना पर बैठ गए।
यहां पर हुई सभा में डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ के जनपदीय अध्यक्ष राजेश कुमार श्रीवास्रूतव ने कहा कि सातवें वेतन आयोग की रिपोर्ट कर्मचारियों के हित में नहीं है।
मांग किया कि राज्य कर्मचारियों को केंद्रीय कर्मचारियों की तरह समस्त भत्तों की समानता प्रदान की जाए। नई पेंशन व्यवस्था को समाप्त करते हुए पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल की जाए, अभी तक का जमा धन निश्चित लाभ के साथ प्रतिवर्ष घोषित किया जाए।
पूर्व में लागू नकदीकरण व्यवस्था को बहाल किया जाए। इसके साथ ही कई अन्य मांगों को रखा। सभा का संचालन अरविंद कुमार यादव ने किया, जबकि अयोध्या प्रसाद विश्वकर्मा, मोहम्मद जमील हसन, प्रियंका श्रीवास्तव, अजय कुमार, सुरेश वर्मा, ईश्वर चंद सिंह आदि लोग उपस्थित रहे।
इसी क्रम में राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष विजय प्रताप पाल व मंत्री राम भवन यादव ने जन जागरण अभियान चलाया।
उन्होंने बताया कि राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने पांच समितियों का गठन किया है, जिसमें विकास भवन के कर्मचारी प्रवीण यादव, सिंचाई विभाग के दीनानाथ उपाध्याय, कलेक्ट्रेट के कर्मचारी बद्री प्रसाद श्रीवास्तव, स्वास्थ्य विभाग के ओपी सिंह, अन्य विभागों के लिए राजेश श्रीवास्तव को शामिल किया गया है।
आंदोलन की सफलता के लिए इन्हें जिम्मेदारी दी गई है। इस दौरान राजेंद्र प्रसाद, नरेंद्र कुमार, रमेश चंद्र, रवि भारती, रामपाल, दिलीप कुमार, कृष्ण कुमार, पवन भारती, राकेश मणि, राजेश वर्मा, रमेश यादव, दिनेश कुमार, वंशीलाल यादव, सुजीत कुमार, बीना झा, भगवान प्रसाद अग्रहरि, दिनेश सिंह, वीपी सिंह, अरविंद यादव, सतीश श्रीवास्तव, सहित तमाम कर्मचारी उपस्थित रहे।