धर्मसिंहवा। रबी की फसल की बोवाई में किसान लगे हुए हैं। किसानों को गेहूं में अगर अच्छी पैदावार पाना है तो 30 नवंबर तक गेहूं की बोवाई कर लें। इसके बाद उन्हें लेट प्रजाति का गेहूं लेकर बोना पड़ेगा। जिला कृषि अधिकारी डॉ. सर्वेश यादव ने बताया कि गेहूं की बोवाई में देरी होने से 10 प्रतिशत तक की पैदावार में कमी आ जाती है।
जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि किसानों को चाहिए 30 नवंबर तक गेहूं की बोवाई कर लें। ऐसा करने से गेहूं का अच्छा उत्पादन तैयार होता है। 30 नवंबर के बाद जिन किसानों को गेहूं की बोवाई करनी है वे किसान देर प्रजाति के गेहूं के बीज की बोवाई कर सकते हैं हालांकि उन्होंने बताया कि 30 के बाद गेहूं की बोवाई करने पर पैदावार में 10 प्रतिशत की कमी आ सकती है। किसानों को चाहिए कि 15 दिसंबर के अंदर देर प्रजाति के गेहूं के बीज की बोवाई हर हाल में कर लें।
जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि किसानों को पारंपरिक खेती में बदलाव करना चाहिए खेतों में दलहन और तिलहन की बोवाई करने से दूसरे वर्ष गेहूं की बुवाई करने पर पैदावार में वृद्धि होती है। बताया कि दलहन और तिलहन फसलों के जड़ों में राइजोवियम बैक्टीरिया पाया जाता है जो की खेत के लिए काफी फायदेमंद होता है। वायुमंडल से ही फसल को नाइट्रोजन उपलब्ध करा देता है। डॉ. सर्वेश यादव ने बताया कि किसानों को चाहिए कि वे जैविक खाद का उपयोग ज्यादा करें।