फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Sant Kabir Nagar News: कोमा से लौटा बेटा...परिजनों से पुलिस ने कहा- कोर्ट से कराएं जांच का आदेश

विज्ञापन
महुली निवासी प्रदीप सोनकर
विज्ञापन
हरिहरपुर/ महुली। तीन साल पहले महुली निवासी युवक को उसके साथियों की मिलीभगत से कुछ लोगों ने अगवा कर बेरहमी से मारापीटा। युवक को मरा समझकर सड़क के किनारे फेंक दिया, जिससे वह कोमा में चला गया। पांच मई की सुबह दवा खिलाते समय कोमा से लौटे युवक ने कांपती आवाज और तीन अंगुलियों के सहारे हमलावरों के बारे में इशारा किया। युवक के होश में आने पर परिजनों को न्याय मिलने की उम्मीद जगी है।
विज्ञापन

महुली गांव निवासी प्रदीप सोनकर (26) पुत्र रवींद्र सोनकर गोरखपुर में तारामंडल के पास जेसीबी ऑपरेटर का काम करता था। उसके साथ गांव का एक व्यक्ति और दो अन्य लोग भी रहते थे। पीड़ित परिजनों के मुताबिक 30 दिसंबर 2022 को उसके साथ रह रहे लोगों की मिलीभगत से कुछ अज्ञात लोगों ने असलहे के बल पर उसका अपहरण कर लिया और उसे राॅड से बेरहमी से मारपीट कर घायल कर दिया।
युवक को मरा समझकर आरोपियों ने उसे गोरखपुर तारामंडल इलाके में सड़क के किनारे फेंक दिया। सूचना पर रामगढ़ ताल चौकी पुलिस ने घायल प्रदीप को बीआरडी मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया। जानकारी होने पर परिजन भी पहुंच गए, लेकिन कोमा में चले जाने के चलते युवक, आरोपियों का नाम बताने में असमर्थ था, जिससे पुलिस ने परिजनों की तहरीर पर अज्ञात के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की। प्रदीप की हालत में सुधार न होने पर परिजन उसे लेकर केजीएमयू लखनऊ इलाज के लिए ले गए जहां उसका इलाज चल रहा है।
विज्ञापन

इसी बीच पांच मई की सुबह दवा खिलाते समय कोमा में गए युवक ने अपना दाहिना हाथ उठाकर तीन अंगुलियों के सहारे कांपती आवाज में आरोपियों के बारे में इशारा किया और लड़खड़ाती जुबान से कुछ नाम बताए जिसे परिजन समझ गए। बृहस्पतिवार को परिजन गोरखपुर स्थित रामगढ़ ताल पुलिस चौकी पहुंचकर पुलिस सारी बात बताई। चौकी पुलिस ने तीन साल पहले का मामला बताकर परिजनों को न्यायालय से आदेश कराने की बात कही।


-
माता-पिता ने कहा- कर्ज में डूबा है परिवार
हरिहरपुर/ महुली। तीन साल से बिस्तर पर पड़े प्रदीप सोनकर के माता-पिता की आंखें अपने बेटे की हालत देखकर पथरा गई हैं। रोते हुए प्रदीप की मां उषा देवी ने बताया कि तीन साल से बेटा बिस्तर पर पड़ा है। बेटे की दवा कराने में परिवार आर्थिक रूप से टूट चुका है। घर में दो बेटियां बिन ब्याही हैं अब उनके हाथ पीले करने के लिए कुछ बचा ही नहीं है। उषा ने बताया कि बेटे प्रदीप की कमाई से घर में दो वक्त की रोटी का इंतजाम होता था। जब से वह बिस्तर पर है परिवार की माली हालत बदतर हो गई है। बेटे की दवा कराने में पूरा परिवार कर्ज के बोझ से दबा हुआ है। प्रदीप के पिता रवींद्र सोनकर ठेले पर सब्जी बेचकर परिवार का भरण पोषण करते हैं। उन्होंने बताया कि चार भाइयों में प्रदीप दूसरे नंबर का है, जिस समय उसके साथ हादसा हुआ उसके शादी विवाह की चर्चा भी चल रही थी। पिता रवींद्र सोनकर ने बताया कि तीन साल बाद जब बेटा कोमा से बाहर आया तब परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद जगी है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें