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खोद कर छोड़े गए शौचालयों के गड्ढे हादसे को दे रहे दावत

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सराय घाट में शौचालय के सामने खुला गड्ढा। - फोटो : KHALILABAD
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खोद कर छोड़े गए शौचालयों के गड्ढे हादसे को दे रहे दावत
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- हरिहरपुर में शौचालय के गड्ढे में गिरने से मासूम की मौत की घटना से सबक नहीं ले रहे जिम्मेदार
अमर उजाला ब्यूरो
संतकबीरनगर। घर-घर शौचालय बनाए जाने की मुहिम चली। इसके लिए लाभार्थियों को शासन की ओर से 12000 रुपये प्रोत्साहन राशि भी दी गई। वर्ष 2014 के बाद से अब तक 2.80 लाख शौचालय सरकारी प्रोत्साहन की राशि से जिले में बनवाए गए। जनवरी 2019 के बाद से अब तक 67,359 लाभार्थियों को शौचालय के लिए प्रोत्साहन राशि दी गई है। लेकिन अब भी दस प्रतिशत शौचालय निर्माणाधीन है। जबकि 31 नवंबर 2018 को जिला ओडीएफ घोषित हो गया है। अब भी जगह-जगह शौचालयों के गड्ढे खोद कर छोड़ दिए गए हैं। खोद कर छोड़े गए गड्ढे हादसे को दावत दे रहे है। इस दिशा में न तो लाभार्थी ध्यान दे रहे हैं और न ही प्रशासनिक अधिकारी।
धनघटा प्रतिनिधि के अनुसार विकास खंड हैंसर बाजार और पौली में शौचालयों के निर्माण में बरती गई अनियमितता के बारे में लाभार्थी खुद बयां कर रहे है। भंडा गांव के रामतीरथ के घर के पीछे बना शौचालय अधूरा पड़ा है। सरायघाट गांव निवासी महेंद्र के घर बने शौचालय का निर्माण प्रधान और सचिव द्वारा वर्ष 2017 में कराया गया। महेंद्र का कहना है कि वह खुद अपने पास से रकम लगाए तब शौचालय तैयार हुआ लेकिन गड्ढे पर ढक्कन प्रधान को लगवाना था जो अब तक नहीं लगा।
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पौली ब्लॉक के मड़पौना गांव में प्रधान व सचिव द्वारा 91 शौचालय बनाए जाने के लिए धन की निकासी की गई। जिसमें से 90 शौचालयों का आधा निर्माण करके और गड्ढा खोद कर छोड़ दिया गया है। लाभार्थी रामचेत, जयप्रकाश, प्रमीला देवी, झिनकान आदि का कहना है कि प्रधान और सचिव गड्ढे पर ढक्कन नहीं लगवा रहे और अपूर्ण कार्य को पूर्ण नहीं करा रहे है। गड्ढे में बच्चे गिर न जाए इसके लिए सतर्कता बरतनी पड़ रही है। प्रधान राजुल का कहना है कि अधूरे पड़े शौचालयों को पूरा कराया जा रहा है। सभी गड्ढों के ढक्कन भी बनवाकर रखा गया है। जल्द ही लगवा दिया जाएगा। इसी तरह बरगदवा, गायघाट पूर्वी, रामपुर दक्षिणी, गायघाट दक्षिणी, तामा, लहुंरेगांव में बनाए गए शौचालयों का हाल है। लाभार्थी केशव, रामप्रसाद, जैश्री, कमरुदीन, जलालुददीन, आरिफ आदि का कहना है कि प्रधान और सचिव केवल शौचालय की रकम निकालने तक अपनी जिम्मेदारी समझें। शौचालय को पूर्ण कराने का काम भूल गए। जिसके कारण शौचालय अधूरे और गड्ढे खुले पड़े हैं। एडीओ पंचायत शिवकुमार तिवारी का कहना है कि शौचालय के गड्ढों पर ढक्कन न लगाए जाने की जानकारी उन्हें नहीं है। यदि गड्ढे खुले है तो उसे जल्द बंद कराया जाएगा। जिससे कोई दुघर्टना की संभावना न रहे।
हरिहरपुर प्रतिनिधि के अनुसार नाथनगर ब्लॉक के भिनखिनी खुर्द ग्राम पंचायत के गूमानारी उर्फ बहराई में स्थित पूर्व माध्यमिक विद्यालय में बने शौचालय का गड्ढा छ: महीने से खुला पड़ा है। यही नहीं शौचालय की दीवार खड़ी कर बिना छत लगाए उसे छोड़ दिया गया है। भिनखिनी खुर्द गांव निवासी हरिराम, दशरथ, धनुषधारी, राम कोमल, राम रक्षा आदि ने बताया कि अब तो बच्चों को ऐसे विद्यालय में भेजने से डर लग रहा है।
मेंहदावल प्रतिनिधि के अनुसार क्षेत्र में कई गांवों में शौचालय के गड्ढे खोद कर छोड़ दिए गए है। यहां तक कि नगर पंचायत क्षेत्र में भी कई सेफ्टी टैंक अधूरे पडे़ हैं। ग्राम पंचायत रक्शा में कई माह से शौचालय का सेफ्टी टैंक अधूरा पड़ा हैं। नगर पंचायत मेंहदावल के सानी केवटलिया वार्ड में शौचालय की टंकी नहीं बनी है। इस संबंध में ईओ प्रदीप कुमार शुक्ला व एडीओ पंचायत मोईनुद्दीन सिद्दीकी ने बताया की शौचालयों के अधूरे सेफ्टी टैंक जल्द पूर्ण करा दिए जाएंगे। बिना ढक्क्न वाले शौचालयों को चिह्नित कराया जा रहा है।
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जिले में बिना ढक्कन वाले शौचालयों को चिह्नित कर कराया जा रहा है। सुरक्षा और स्वच्छता के लिहाज से भी ढक्कन बेहद जरूरी है। लाभार्थियों को प्रेरित करने के लिए प्रधान, रोजगार सेवकों और स्वेच्छा ग्रहियों को लगाया गया है। एडीओ पंचायत को निर्देश दिए गए है कि जहां कहीं शौचालयों के गड्ढे खोद कर छोड़ दिए गए हो वहां तत्काल काम पूर्ण कराए। जिससे छोटे बच्चों और जानवरों के गड्ढे में गिरने की आशंका समाप्त हो सकें।
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- आलोक कुमार प्रियदर्शी, डीपीआरओ
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शौचालयों के गड्ढे खोद कर लंबे समय से छोड़ देना हादसे को दावत देना है। ऐसा करके छोड़ने वालों को भी सुरक्षा के लिहाज से सोचना चाहिए। डीपीआरओ को कड़े निर्देश दिए गए है कि वह अभियान चलाकर खोद कर छोड़े गए शौचालयों के गड्ढों का पता कराए और फिर प्रधान और सचिव के माध्यम से अधूरे निर्माण कार्य को पूरा कराए। शौचालयों पर ढक्कन लगना नितांत जरूरी है।
- बब्बन उपाध्याय, सीडीओ
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