चार साल बाद भी एसआईटी की जांच रिपोर्ट का पता नहीं
वर्ष 2015 में जल निगम के निर्माण खंड में दूसरे मद से ठेकेदारों को 82 लाख रुपये भुगतान का मामला
पूर्व डीएम द्वारा जांच कराने पर मामला हुआ था उजागर
अमर उजाला ब्यूरो
संतकबीरनगर। जल निगम के निर्माण खंड की ओर से कराए गए कार्यों का बिना बजट के दूसरे मद से भुगतान किए जाने के मामले की जांच चार साल से अधिक समय से एसआईटी कर रही है। सूत्र बताते हैं कि एसआईटी की जांच पूूूरी हो चुकी है। मामला शासन में लंबित है।
जल निगम निर्माण खंड के अधिशाषी अभियंता वीरेंद्र पांडेय ने वर्ष 2015 में स्थानांतरण के बाद भी वित्तीय प्रभार अपने पास रखा था। अभियंता ने ठेकेदारों को 21 चेक से भुगतान कर दिया था। इसमें 17 चेक से 82 लाख 63 हजार रुपये से अधिक का भुगतान किया गया था। जबकि चार चेक कैश नहीं हुए। जिस मद से भुगतान हुआ था, उसका विभाग के पास बजट ही नहीं था। मामला संज्ञान में आने के बाद पूर्व डीएम ने प्रकरण की पहले जिला स्तर से टीम गठित कर जांच कराई तो मामला उजागर हुआ था। इसे गंभीर अनियमितता मानते जांच एसआईटी को सौंप दी गई।
सूत्रों के अनुसार लंबे समय तक एसआईटी को जांच के लिए जल निगम के जिम्मेदारों की ओर से अभिलेख नहीं उपलब्ध कराए गए। बाद में मामला पूर्व सीडीओ हाकिम सिंह के संज्ञान में आने पर उनके निर्देश पर अभिलेख उपलब्ध कराए गए। जल निगम के एक्सईएन वी पी सिंह ने बताया कि एसआईटी की ओर से जो भी अभिलेख मांगे गए थे, उन्हें उपलब्ध करा दिया गया था। जांच और कार्रवाई के बारे में एसआईटी के जिम्मेदार ही बता पाएंगे।