पांच सौ व एक हजार की नोटबंदी से ग्रामीण क्षेत्रों में जहां आपाधापी मची हुई है वहीं खलीलाबाद में अधिकतर बैंकों पर भीड़ कम होने लगी है। कारण कि बैंक सिर्फ अपने खातेदारों से ही लेनदेन कर रहे हैं। ऐसे में सुबह से लेकर जब तक कैश खत्म नहीं हो रहा है एटीएम के बाहर से भीड़ खत्म नहीं हो रही है।
खलीलाबाद के स्टेट बैंक की मुख्य शाखा, कृषि शाखा, बैंक आफ इंडिया, एक्सिस बैंक, ओरियंटल बैंक आफ कामर्स, पंजाब नेशनल बैंक, बैंक आफ इंडिया, एचडीएफसी बैंक, यूनियन बैंक आदि में लेनेदेन हुआ। इन बैंकों पर अपेक्षाकृत भीड़ कम रही। दूसरी तरफ शहर के एटीएम पर सुबह से ही लाइन लग गई थी। स्टेट बैंक की मुख्य शाखा का दो एटीएम में से एक ही चालू रहा, जबकि कृषि शाखा का एटीएम बंद रहा। इसी प्रकार स्टेट बैंक के विकास भवन स्थित एटीएम में भी रुपये नहीं थे, जिसके कारण शटर नहीं खुला। एक्सिस बैंक के मैनेजर विश्वजीत राय ने बताया कि शहर में बैंक के कुल चार एटीएम है, सभी में पैसे डाल दिए गए हैं। इसमें दो हजार के नोट भी शामिल हैं। उपभोक्ता एटीएम से रुपये निकाल सकते हैं। एचडीएफसी का एटीएम भी दिनभर बंद रहा।
हालांकि सभी एटीएम पर लंबी कतार लगी रही। लोगों को एक से दो घंटे लाइन में लगने के बाद रुपये मिल पाए।बखिरा प्रतिनिधि के अनुसार स्टेट बैंक प्रबंधक किशनपाल ने बताया कि अधिकतर लोगों द्वारा नगदी जमा करा दी गई है। अब निकासी करने वाले ही लोग कतार में लगे हुए हैं। सुबह के समय बैंक पर जुटी भीड़ दोपहर होते-होते छंट गई। बैंक में व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैनात रहने वाली पुलिस की संख्या भी मात्र एक ही देखी गई। अन्य दिनों में पूरे दिन गेट बंद रखा जाता था, जबकि गुरुवार को बैंक का मुख्य गेट भी खुला रहा। रामनोख, श्याम, रवीश, शिवकुमार, इसरावती ने कहा लग्न काफी तेज है। नतीजतन बैंक परिसर में लोगों की भीड़ काफी कम दिख रही है।
वैसे अभी भी लोगों की नगदी की मुसीबत कम नही हुई है। बैंक से केवल दो हजार के नए नोट ही दिए जा रहे है। छोटे नोटों की जरूरत अभी भी बनी है। शादियों से फुर्सत मिलते ही लोगो की कतार पुन: दिखने लगेगी। नंदौर प्रतिनिधि के अनुसार नोटबंदी के बाद खुदरा के लिए परेशानी हो रही है। श्रीप्रकाश मिश्र, आशुतोष पांडेय, अक्षयबर यादव, अंजनी मिश्र, सुभाषचंद्र पाठक, बसंतपाल, अजीत, रामवृक्ष, राधेश्याम, सुशीला, कृष्णावती, शोभिता आदि लोगों ने कहा कि दुकान पर सामान खरीदने के लिए छोटे नोट ग्राहक दे रहे हैं, लेकिन दो हजार का नोट देने पर दुकानदार छुट्टा न होने की बात कह लौटा दे रहे हैं।