मड़या टीचर्स कालोनी में श्रीमदभागवत कथा कहते हुए आचार्य अनिल त्रिपाठी । स्रोत - आयोजक
संतकबीरनगर। खलीलाबाद के मड़या टीचर कालोनी में आयोजित सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन कथा व्यास आचार्य त्रिपाठी ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा श्रवण करने से मृत्यु का भय समाप्त हो जाता है। यह जीव को अभय कर देती है।
कथा व्यास ने कहा कि राजा परीक्षित ने सुकदेव भगवान से प्रश्न किया कि गुरुदेव जीव की मृत्यु सन्निकट हो तो उसे क्या करना चाहिए। सुकदेव भगवान ने कहा कि राजन! आपने खुद के लिए नहीं, बल्कि समस्त मानव समाज के कल्याण के लिए प्रश्न किया है इसलिए उपाय सुनिए। जीव की मृत्यु सन्निकट हो तो, उसे भगवान की कथा सुननी चाहिए। भगवान का कीर्तन करना चाहिए और भगवान का स्मरण करना चाहिए। भगवान की मान से सेवा सर्वोपरि है। इस विधि से सेवा के लिए किसी भी सामग्री की आवश्यकता नहीं होती और भगवान में मन भी लगता है। कथा व्यास ने कहा कि जीवन में सबसे बड़ा स्थान माता-पिता का होता है। उनकी बदौलत ही जन्म मिला है, और हम सभी कार्य करते हुए भगवान का कथा और भजन करने और सुनने का सौभाग्य प्राप्त कर पाते हैं। इस अवसर पर आयोजक पूर्व प्रवक्ता डीएन पाठक, आलोक पाठक, पंकज पाठक, छोटे लाल पाठक, संतोष, संदेश, कन्हैया आदि मौजूद रहे।