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Sant Kabir Nagar News: सावित्री बाई फुले ने सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ उठाई थी आवाज

Sat, 03 Jan 2026 11:43 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
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संतकबीरनगर। विभिन्न संगठनों ने शनिवार को देश की पहली शिक्षिका और समाज सुधारक सावित्री बाई फुले की जयंती मनाई। खलीलाबाद शहर के मेंहदावल बाईपास के पास आम आदमी पार्टी के कार्यक्रम में जिलाध्यक्ष दुर्विजय सिंह यादव ने कहा कि सावित्रीबाई फुले ने संपूर्ण जीवन महिलाओं को शिक्षित करने में समर्पित कर दिया था। सावित्रीबाई फुले न केवल शिक्षिका थीं बल्कि महान समाज सुधारक, कवयित्री और नारी मुक्ति आंदोलन की अग्रदूत भी थीं। उन्होंने शिक्षा को सामाजिक क्रांति का सबसे बड़ा हथियान माना और जीवन भर शोषित और वंचित समाज के अधिकारों के लिए संघर्ष किया।
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मुख्य वक्ता तिरंगा शाखा के प्रदेश सचिव डॉ. धर्मेन्द्र आर्य ने कहा कि सावित्रीबाई फुले ने शिक्षा के माध्यम से सामाजिक परिवर्तन लाया। उन्होंने केवल अक्षर ज्ञान ही नहीं दिया बल्कि अधिकारों के लिए संघर्ष करना भी सिखाया। जीवनभर वंचित, दलित, पीड़ित और शोषितों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया।

इस अवसर पर अजय नरायन मिश्र, अरविंद यादव, डॉ. गिरजेश सागर, कृष्ण चंद्र चौधरी, प्रदीप कुमार, सूर्यकांत मौर्य, सुरेश चंद्र, शशिकांत, सिकंदर यादव, आकाश चौधरी, विनय चौधरी, सौमेंद्र प्रताप श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।
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सावित्री बाई फुले की जयंती मनाई गई
तिघरा। बघौली ब्लॉक के जंगल कला गांव में सावित्री बाई फुले की जयंती धूमधाम से मनाई गई। सम्राट क्लब के अनुयायियों ने सावित्रीबाई फुले के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीण, युवा और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए।
राम नरायण मौर्य ने कहा कि सावित्रीबाई फुले देश की प्रथम महिला शिक्षिका होने के साथ सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ संघर्ष की प्रतीक थीं। उन्होंने बालिका शिक्षा, महिला सशक्तीकरण और समानता के लिए आजीवन संघर्ष किया। विषम परिस्थितियों और सामाजिक विरोध के बावजूद उन्होंने शिक्षा के दीप को बुझने नहीं दिया। बृजेश निषाद ने कहा कि सावित्रीबाई फुले ने शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का सशक्त माध्यम बनाया और वंचित वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ने का कार्य किया। उनके बताए मार्ग पर चलकर ही एक समतामूलक और शिक्षित समाज का निर्माण संभव है। कार्यक्रम के दौरान उनके विचारों को आत्मसात करने और नई पीढ़ी को शिक्षित व जागरूक बनाने का संकल्प भी लिया गया। इस दौरान राम अशीष, संगीता, राम रति आदि मौजूद रहे।
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