पौली/रोसयाबाजार (संतकबीरनगर)। जीवन के अंतिम क्षण तक रामकाज में जुटे रहने वाले श्रीराम मंदिर अयोध्या के मुख्य पुजारी सत्येंद्र दास के निधन से उनके पैतृक गांव खर्चा के लोग गमगीन हैं। रामजानकी मार्ग पर स्थित उनके घर में सन्नाटा पसरा हुआ है। निधन की खबर पाकर क्षेत्र के अधिकांश लोग अयोध्या के लिए रवाना हो गए हैं।
ब्राह्मण परिवार में जन्मे आचार्य सत्येंद्र दास मात्र आठ साल की की आयु में ही गांव छोड़कर अयोध्या चले गए। वहीं अपनी शिक्षा ग्रहण की तथा अयोध्या में स्थित एक संस्कृत विद्यालय में शिक्षक रहे। इसके बाद वह राम जन्मभूमि के मुख्य पुजारी अभिराम दासजी के शिष्य बने। बाबा अभिराम दासजी ने 1949 में श्रीराम जन्मभूमि में रामलाल की मूर्ति स्थापित की थी। विवादित ढांचे के विध्वंस के समय रामलला की मूर्ति को गोद में उठाकर एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाया था। राम मंदिर निर्माण से लेकर अंतिम समय तक रामलला की सेवा में जुटे रहे।
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पिछले साल आए थे पैतृक गांव
उनके पिता राम दुलारे एक किसान थे। माता गृहिणी थीं। वह अपने पैतृक स्थान खर्चा में शादी विवाह के मौके पर आया जाया करते थे। 10 साल पहले एक शादी समारोह में वह अपने पैतृक गांव खर्च में आए थे। उसके बाद पिछले साल एक तेरही में शामिल होने आए। ब्रह्मचारी होने के कारण अपने भतीजों के साथ जीवन की खुशियां बांटते रहे। बड़े भतीजे सुशील पांडेय, पवन पांडेय, एवं तीसरे भतीजे रामजन्म भूमि के सहायक पुजारी प्रदीप दास हैं। उन्हीं को अपना उत्तराधिकारी बनाया था जो आज भी राम जन्मभूमि में भगवान राम की सेवा कर रहे हैं।
पुजारी के निधन से आहत दिखे लोग
जन्मभूमि के मुख्य पुजारी सत्येंद्र दास जी के निधन की खबर जैसे ही क्षेत्र में पहुंची है जिन जिन लोगों ने सुना उनके चेहरे पर भावुकता के साथ उदासी छा गई। लोग घर पहुंच रहे थे, लेकिन वहां कोई नहीं था, सभी अयोध्या जा चुके थे। उनके आवास पर कमलेश दास राधेश्याम रामचंद्र अर्जुन पांडे, टिल्लू बाबा, मनोज कुमार, जुबेर अहमद खान समेत अन्य लोग पहुंचे और किसी के न मिलने से काफी आहत दिखे।