धनघटा। सरयू के तेजी से घट रहे जलस्तर के बाद बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के किसानों को अब कटान का खतरा सताने लगा है। पानी कम होने से लोगों को थोड़ी राहत जरूर मिली है लेकिन बाढ़ की दुश्वारियां अभी भी कम नहीं हुई हैं।
कई स्थानों पर संपर्क मार्गों पर पानी होने से ग्रामीणों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सियर कला, गुनवतिया, चकदहा, भौवापार समेत सात गांव के लोगों को अभी भी नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। इसके बावजूद लोगों को आने-जाने की समस्या बनी हुई है। रोजमर्रा के जरूरी कामों के लिए लोग नाव से आ जा रहे हैं।
जिन गांव का पानी सूख गया है वहां के लोगों को कीचड़ युक्त रास्ते से आवाजाही करनी पड़ रही है। स्कूल बाजार और अन्य जरूरी स्थानों पर पहुंचने के लिए लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीण रामलोचन, राम शंकर, शेषनाथ, भवानी प्रसाद, रामनरेश, शिवराम, राधे आदि का कहना है कि दरवाजे तथा घर के चारों तरफ बाढ़ का पानी फैल चुका था। अभी भी गड्ढों में पानी भरा हुआ है। इसके कारण दिन में ही मच्छरों का प्रकोप रहता है। रात में तो मच्छरों के कारण सोना मुश्किल हो गया है।
इसके बाद भी दवा का छिड़काव नहीं कराया जा रहा है। सियरकला जाने वाले मार्ग का करीब 200 मीटर हिस्सा कट कर बह गया है। वहां पर एक नाव चलाई जा रही है, जो अपर्याप्त है। नदी का पानी घटने के बाद दौलतपुर, गायघाट दक्षिणी, जगदीशपुर में कटान का खतरा बढ़ गया है। खेतों के किनारे मिट्टी कटने के कारण किसानों की चिंता बढ़ गई है।
ग्रामीणों ने कटान वाले स्थानों पर निगरानी बढ़ाने और जरूरी इंतजाम किए जाने की मांग की है। जहां पर पानी कम होने की वजह से नाव संचालित नहीं हो पा रही है वहां लोग पानी में घुसकर आ जा रहे हैं। बाढ़ प्रभावित गांव के लोगों का कहना है कि तहसील प्रशासन ने नाव का प्रबंध जरूर किया लेकिन वह भी अपर्याप्त रहा।
इसके अलावा प्रशासन की ओर से बाढ़ पीड़ितों की कोई मदद नहीं की गई, जबकि बाढ़ पीड़ित बाढ़ के कारण पूरी तरह बर्बाद हो चुके हैं।
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राप्ती का जलस्तर दो सेंटीमीटर बढ़ा
मेंहदावल। राप्ती का जलस्तर सोमवार को 76.13 मीटर था। मंगलवार को दो सेंटीमीटर जलस्तर दोपहर बाद बढ़ गया। इसके कारण नदी का जलस्तर सुबह 8:00 बजे 76.13 मीटर था वहीं सायं 4:00 बजे नदी का जलस्तर 76.15 मीटर पर पहुंच गया। फिलहाल विभागीय अधिकारी मौके पर कैंप करते हुए जलस्तर की निगरानी कर रहे हैं।