संवाद न्यूज एजेंसी
लोहरैया। धनघटा तहसील क्षेत्र में सरयू का जलस्तर धीरे-धीरे कम होने लगा है। नदी अब अपने पुराने बहाव क्षेत्र में लौट रही है। इससे नदी किनारे बसे गांवों के लोगों ने कुछ राहत की सांस ली है। हालांकि बाढ़ का पानी गांवों और खेतों से पूरी तरह निकल नहीं पाने के कारण ग्रामीणों की परेशानियां अभी कम नहीं हुई हैं।
भौवापार, ढोलबजा, सियरकला, गायघाट, करनपुर समेत आसपास के कई गांवों में पानी अब भी रास्तों और खेतों में लगा है। कई दिनों से खेतों में पानी रहने के कारण खरीफ की फसलें खराब हो गई हैं। किसानों के सामने फसल बर्बाद होने से आर्थिक नुकसान की चिंता बढ़ गई है। खेतों में पानी होने के कारण पशुओं के लिए हरे चारे की भी समस्या उत्पन्न हो गई है।
ग्रामीणों को दूर-दराज के क्षेत्रों से चारा लाकर पशुओं को खिलाना पड़ रहा है।गांवों के आसपास और रास्तों पर जमा पानी अब सड़ने लगा है। पानी से दुर्गंध उठने लगी है। इससे ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों को आशंका है कि लंबे समय तक पानी रहने से मच्छरों का प्रकोप बढ़ सकता है और संक्रामक बीमारियां फैल सकती हैं।
ग्रामीणों ने प्रभावित गांवों में दवा और कीटनाशक का छिड़काव कराने की मांग की है। दौलतपुर निवासी मोहिनी ने कहा कि नदी अपने बहाव क्षेत्र में लौट रही है। ऐसे में नदी कटान करती है, जिससे कृषि योग्य भूमि नदी के उतरते पानी से कट सकती है।
गायघाट निवासी रमेश, ढोलबजा निवासी पूरन और करनपुर निवासी रमेश ने बताया कि नदी का जलस्तर कम होना राहत की बात है।