फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Sant Kabir Nagar News: 24 घंटे में 25 सेंटीमीटर बढ़ी सरयू तटवर्ती गांवों के लोगों की बढ़ी चिंता

Sun, 02 Aug 2026 11:39 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
विज्ञापन
बिड़हर घाट में मंदिर से सटकर बहती सरयू नदी। संवाद
विज्ञापन
धनघटा। सरयू नदी एक बार फिर तेजी के साथ बढ़ते हुए रविवार को 78.55 मीटर पर पहुंच गई। 24 घंटे में नदी के जलस्तर में 25 सेमी की वृद्धि हुई है।
विज्ञापन

दो दिन पहले नदी का जलस्तर घटते हुए 78.15 पर पहुंच गया था, लेकिन इधर दो दिनों में नदी के पानी में 40 सेंटीमीटर का इजाफा हुआ है। नदी रविवार को 78.55 पर पहुंच गई। बाढ़ का पानी पूरब में गायघाट दक्षिणी, चकदहा, गुनवतिया, ढोलबजा, दौलतपुर, सुअरहा आदि गांवों के फसलों को डुबा दिया है। बिड़हर घाट पर नदी का पानी अभी करार के नीचे बना हुआ है। गांव वालों का कहना है कि नदी यदि खतरे के निशान को पार की तो बाढ़ का पानी एमबीडी बांध पर पहुंचकर दबाव बनाना शुरू कर देगा। हालांकि तुरकौलिया नायक गांव के सामने नदी का पानी एमबीडी बांध पर पहुंच कर दबाव बनाना शुरू कर दिया है। यहां पर पीचिंग होने की वजह से बाढ़ के पानी का असर बांध पर नहीं पड़ रहा है जबकि पूरब में पिचिंग नहीं है तो बांध के मजबूती के लिए बांध पर बालू भरी बोरी लगाई जा रही है।
सरयू ने 17 साल में काट दिए पांच से ज्यादा गांव : तहसील के दक्षिणी छोर से होकर बहने वाली सरयू नदी का रौद्र रूप पिछले 17 वर्षों में लगातार तबाही मचा रहा है। नदी की तेज कटान अब तक पांच से ज्यादा गांवों और उनके पूर्वे के अस्तित्व को समाप्त कर चुकी है। नदी की कटान से सैकड़ों एकड़ उपजाऊ भूमि जहां नदी की धारा में समा चुकी है वहीं सैकड़ों परिवार अपना पुस्तैनी घर छोड़कर दूसरे स्थानों पर बस्तियां बसाने को मजबूर हैं। कटान का सिलसिला अब भी जारी है।
विज्ञापन

नदी का जलस्तर कम होने के बाद उपजाऊ जमीन कट कर नदी की धारा में समाती चली आ रही है। तटवर्ती गांव के लोग हर साल बाढ़ और कटान के भय के बीच जीवन बिताने को विवश हैं। धनघटा क्षेत्र में साल 2013 में कटान ने विकराल रूप धारण किया। कटान ने तुरकौलिया नायक गांव के अस्तित्व को मिटाते हुए 500 बीघा से अधिक जमीन काटकर नदी ने अपने धारा में मिला लिया। यहां के वीरेंद्र यादव बताते हैं कि 150 से अधिक घर नदी की धारा में समा गए तो करीब दो किलोमीटर दूर रामजंगला में गांव के लोग बसाए गए। इसी तरह भिखारीपुर, गायघाट दक्षिणी, तुरकौलिया लाल, अशरफपुर गांव नदी की धारा में समाहित हो गए थे। भिखारीपुर करीब 200 बस्ती वाला गांव पूरी तरह नदी की धारा में समाहित हो गया था।
विज्ञापन

भिखारीपुर निवासी रामलोचन बताते हैं कि कटान के कारण मूल बस्ती कटान की भेंट चढ़ गई। गायघाट दक्षिणी में 100 से अधिक मकान नदी की धारा में समा चुके हैं। दौलतपुर गांव निवासी शिवप्रसाद, रामदीन बताते हैं कि उनके गांव की करीब 200 बीघा जमीन कट चुकी है। पानी जब घटता है तो कटान होती है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें