महुली। धनघटा क्षेत्र में बहने वाली सरयू नदी लगातार अपना राैद्र रूप दिखा रही है। नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। खतरे के निशान तक पहुंच चुकी सरयू नदी के जलस्तर में पांच सेंटीमीटर की कमी आई है। वर्तमान में वह इसी पर स्थिर है।
सरयू की मुख्य धारा और बंधे के बीच में बसे 32 गांव के लोगों की परेशानियां लगातार बरकरार हैं। वहीं ढोलबजवा गांव में हो रही कटान को रोकने के लिए झाड़ियां और बालू की बोरियां डाली जा रही हैं। ताकि नदी के प्रवाह को कम किया जा सके और कटान को रोका जा सके।
सरयू नदी के बढ़ते जलस्तर के चलते स्थिति काफी विकराल हुई है। आलम यह है कि बिड़हरघाट में सरयू नदी पर जहां लोगों का दाह संस्कार किया जाता है, वहां पर श्मशान घाट पर पानी आ गया है। श्मशान घाट के किनारे जहां लोगों के वाहनों को खड़ा किया जाता है, वहां पर भी पानी भर गया है। अब अधिकतर वाहन बंधे पर खड़े हो रहे हैं।
उमरिया के पारस बताते हैं कि पिछले 10 साल में इतना अधिक पानी इस स्थान पर भरा दिखाई नहीं दिया था। बिड़हर घाट पर इतना पानी कभी नहीं आया था। वहीं ढोलबजवा के पास सरयू नदी लगातार कटान कर रही है। इस कटान के चलते मुख्य मार्ग का काफी बड़ा हिस्सा कटकर नदी में विलीन हो चुका है। केवल दो फिट चौड़ी सड़क ही अब बची हुई है। वहां पर पेड़ों की डालियों को काटकर लगाया जा रहा है। इसके साथ ही बांस के बड़े-बड़े पिजड़े बनाए जा रहे हैं।
इन पिजड़ों में बालू की बोरियों को भरकर कटान स्थल पर लटकाया जाएगा। ताकि वहां की मिट्टी न बहे और पानी का सीधे प्रवाह सड़क पर न हो और कटान को रोका जा सके।
करनपुर, कटहा, ढोलबजवा जाने वाले रास्ते पर जगह-जगह पानी भरा हुआ है। स्थिति यह है कि इस क्षेत्र के सारे पुल और पुलिया भी डूब गए हैं। आने-जाने के लिए गांवों में नाव लगाई गई हैं। स्थानीय लेखपालों की टीम भी नाव की व्यवस्था के संचालन में जुटी हुई है ताकि गांव के लोगों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जा सके।
गायघाट के लेखपाल अजीत यादव के साथ ही ढोलबजवा के लेखपाल गिरजेश यादव हर व्यक्ति को आवश्यक सुविधाएं मुहैया करा रहे हैं।