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Sant Kabir Nagar News: सरयू की बाढ़ ने बढ़ाई दहशत...25 गांव घिरे, चार सौ घरों में घुसा पानी

Tue, 17 Sep 2024 11:22 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
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- खतरे के निशान से पांच सेमी ऊपर बह रही नदी
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- आगापुर गुलरिहा गांव के लोगों ने बांध पर ली शरण
- बाढ़ प्रभावित गांवों की बिजली आपूर्ति ठप
- प्रशासन ने गांवों में 39 नावें लगाईं

संवाद न्यूज एजेंसी

धनघटा। सरयू नदी में उफान से बेकाबू लहरों ने तबाही मचानी शुरू कर दी है। धनघटा क्षेत्र के तटवर्ती 25 गांवों के 400 घरों में बाढ़ का पानी पहुंच गया है। खेत जलमग्न हैं। रास्ते पर पानी पहुंचने से गांवों का संपर्क टूट गया है है। मंगलवार को पशुओं के साथ आगापुर गुलरिहा गांव के लोग बंधे पर आकर शरण लिए हुए हैं। हालांकि सांसद और विधायक ने क्षेत्र में भ्रमण कर बाढ़ प्रभावित परिवार को सरकारी सहायता दिलाए जाने का भरोसा दिया है।

बिड़हर घाट पर सरयू नदी खतरे के निशान से पांच सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। लाल निशान 79.400 को पार कर 79.450 मीटर पर मंगलवार की शाम चार बजे तक स्थिर है। तहसील क्षेत्र के पूर्वी छोर से लेकर पश्चिमी छोर तक 25 गांव बाढ़ के पानी से चारों तरफ से घिर गए हैं। अगापुर गुलरिहा, खालेपुरवा, ढोलबजा, कुर्मियान टोला, नारायणपुर, गुनवतिया, चकदहा, दौलतपुर, सियाराम अधीन समेत 16 गांवों में सोमवार की दोपहर से बाढ़ का पानी घुसा हुआ है। उन गांव के लोगों को रहने, खाने, पशुओं को खिलाने का संकट है।
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मंगलवार को सांसद लक्ष्मीकांत उर्फ पप्पू निषाद ने बाढ़ प्रभावित गांव का दौरा किया। कहा कि गरीबों की हितैषी होने का दावा करने वाली सरकार में आपदा के समय ध्यान देने वाला कोई नहीं है। बाढ़ के स्थाई निदान के लिए लोकसभा में मामला उठाएंगे। इस संबंध में तहसीलदार योगेंद्र पांडेय ने कहा कि नदी का जलस्तर स्थिर है। इन गांवों में 39 नावें लगाई गई हैं।

टॉर्च और मोबाइल की रोशनी में रहना मुश्किल
माझा खड़कपुर निवासी दीनदयाल निषाद, अगापुर गुलरिहा निवासी साधु, कैलाशपति, राममूरत, राम सकल, हरीश, उदयभान, गौरी शंकर, राममिलन का कहना है कि घरों में बाढ़ का पानी घुसा है। दरवाजे पर खड़ा होने की जगह नहीं बची है। खेत से लेकर खलिहान तक पानी ही पानी है। गांव में पानी होने की वजह से बिजली कटौती भी है। टॉर्च और मोबाइल की रोशनी तले पानी में घुसकर सुरक्षित स्थान पर आना-जाना कठिन हो गया है। पानी होने की वजह से जहरीले कीड़े के काटने का डर बना है। पशुओं को लेकर बंधे पर आकर किसी तरह बसर तो किया जा रहा है। पशुओं को खिलाने के लिए चारा का संकट है।

डूब गए सामान...संपर्क मार्ग भी टूटा
अगापुर गुलरिहा गांव के प्रधान राम सुरेश ने बताया कि गांव के 400 घरों में बाढ़ का पानी घुस गया है। लोग गांव में ऊंचे स्थान पर पहुंचकर शरण लिए हुए हैं। घरों में बाढ़ का पानी होने के कारण सामान डूब गए हैं। गांव के सभी संपर्क मार्गों पर पानी भरा हुआ है। इसी तरह पूर्वी क्षेत्र गायघाट दक्षिणी के आसपास के गांव के संपर्क मार्ग टूट गए हैं।

पांव तले पानी, पेट है खाली... आफत में फंसी जिंदगानी
- अगापुर गुलरिहा गांव में बाढ़ से घिरे गांव के लोगों को खाने को लाले
धनघटा। सरयू की बाढ़ से धनघटा तहसील के 25 गांव तो प्रभावित हैं, लेकिन सबसे विकट स्थिति अगापुर गुलरिहा गांव में देखने को मिल रही है। मंगलवार को छप्पर के मकान के बगल में पानी में चारपाई पर बैठे मुरझाए चेहरे लिए बच्चों पर नजर पड़ी तो कदम रुक गए। पूछने पर बच्चों ने बताया कि आज दूसरा दिन है न तो भोजन मिला और न ही नींद नसीब हुई। इस तरह की आफत भरी जिंदगी कभी नहीं जिए हैं।


अगापुर गुलरिहा गांव के करीब 400 घर की 2000 आबादी बाढ़ से पूरी तरह प्रभावित हैं। इन्हीं में शामिल शैलेंद्र के छप्पर के मकान में घर से लेकर बाहर तक बाढ़ का पानी भरा है। छप्पर के बगल में पांच भाई बहन चारपाई डालकर उस पर बैठकर अपने भाग्य पर आंसू बहा रहे हैं। पूछने पर पहले तो यह बच्चे कुछ भी नहीं बोले लेकिन 15 वर्षीय सोनी कां कहना है कि सोमवार की दोपहर से पहले दरवाजे पर पानी चढ़ गया। उसके दो ही घंटे बाद घर में भी घुस गया। चूल्हा जिस जगह है उस जगह तो पानी भर ही गया। राशन का सामान सब भीग कर बर्बाद हो गया।
शाम के समय भोजन नहीं बन सका है और सभी भाई-बहन इसी चारपाई पर बैठकर रात बिताए। सुबह हुआ तो पानी में चलकर भाई रंजीत बंधे तक पहुंचा और वहां से बिस्किट लाया। जिसे सभी लोग खाए हैं। पिता बाहर मेहनत मजदूरी करते हैं। हम लोग मां के सहारे घर पर हैं।
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न भोजन का इंतजाम... न ही रहने का ठिकाना, ऐसी तबाही कभी नहीं देखी
आगापुर गांव में आगे बढ़ने पर पानी में तख्त रख कर राजाराम और उनके परिवार के लोग और उनके परिवार के लोग बैठे हुए थे। उनका कहना था कि बाढ़ तो हर वर्ष आती है, लेकिन इस वर्ष की तरह तबाही कभी नहीं थी। न तो खाने का इंतजाम न रहने का ठिकाना। बच्चे भूख से बिलबिला रहे हैं। सरकार की तरफ से अभी तक कोई सहायता नहीं मिली है, तबाही झेल लेने के बाद सहायता राशि किस काम की। कमोवेश इसी तरह की परेशानी गांव के अधिकतर लोगों के सामने है।
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