- ग्रामीणों के संकट को देखते हुए प्रशासन ने लगाईं 12 नावें
- मदरा से अशरफपुर तक पांच किमी लंबे तटबंध पर बढ़ा दबाव
संवाद न्यूज एजेंसी
धनघटा। क्षेत्र में सरयू की बाढ़ का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। 14 गांव पानी से घिर चुके हैं, संपर्क मार्गों पर पानी भर जाने से इन गांवों के लोगों की दुश्वारियां बढ़ गई हैं। ग्रामीणों के संकट को देखते हुए प्रशासन ने आवाजाही के लिए 12 नाव लगा दी हैं। वहीं, तिघरा में स्थित इंटर कॉलेज में बाढ़ पीड़ितों के लिए शरणालय बनाया गया है।
धनघटा क्षेत्र में रविवार को सरयू का जलस्तर स्थिर रहा। शाम चार बजे जलस्तर 79.150 मीटर दर्ज किया गया। मांझा क्षेत्र के 14 गांव बाढ़ से चौतरफा घिर गए हैं। मदरा से अशरफपुर तक लगभग पांच किलोमीटर तक तटबंध पर नदी का दबाव बना हुआ है। आगापुर गुलरिहा गांव भी बाढ़ से घिर गया है। आगापुर के राम कृपाल, हरेंद्र, पवन और संजय कुमार ने बताया कि नदी के जलस्तर में और वृद्धि हुई तो पानी घरों में पहुंच जाएगा। प्रभावित गांवों के संपर्क मार्ग भी पानी में डूब गए हैं। ग्रामीणों की सुविधा के लिए प्रशासन ने नाव की व्यवस्था की है।
ग्रामीणों ने कहा कि फसल के साथ हरा चारा भी पानी में डूबने से नष्ट हो गया है। अब पशुओं के लिए चारे का इंतजाम करना मुश्किल हो रहा है। बाढ़ से घिरे खालेपुरवा, केवटाही, पटौवा टोला, तीरथ पुरवा, सियर कला, दौलतपुर, चकदहा, कंचनपुर, गायघाट दक्षिणी, कटहा, सियाराम अधीन, गुनवतीय, सुअरहा आदि गावों के संपर्क मार्ग डूबने से ग्रामीणों के लिए बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। मदरा से खालेपुरवा जाने वाली पिच सड़क पानी में डूबी हुई है। गायघाट दक्षिणी के ग्रामीण अवधेश, चन्द्रभान, अनिल कुमार, मनीराम, राम सजन, नरसिंह, बलिन्दर, रामहित आदि ने बताया कि बाढ़ का पानी कभी भी घरों में पहुंच सकता है। महीने भर से नदी के जलस्तर में उतार-चढ़ाव के कारण लोग दुश्वारियों का सामना कर रहे हैं।
छतों पर रहने का कर रहे इंतजामपानी से घिरे गांवों के लोग अभी भी घरों में रह रहे हैं। श्यामरथी, गुलाबा और शकुंतला देवी ने बताया कि पिछली बार बंधे पर शरण लेने वाले सैकड़ों परिवारों को खुले आसमान के नीचे रहना पड़ा था। खाने-पीने की भी समस्याएं झेलनी पड़ीं थीं। इन ग्रामीणों ने कहा कि इस बार अधिकांश परिवार घर पर मौजूद हैं। कुछ लोग घर में पानी घुसने की आशंका को देखते हुए छत पर रहने का इंतजाम करने में जुटे हुए हैं। हालांकि प्रशासन का कहना है कि तिघरा में स्थित इंटर कॉलेज में बाढ़ शरणालय बनाया गया है, वहां बाढ़ पीड़ितों के रहने-खाने के साथ ही पशुओं के चारे का भी इंतजाम किया गया है।
चारे के संकट से पार पाना चुनौती
दो माह से गायघाट इलाका बाढ़ में डूबा हुआ है। लगातार पानी भरे होने से हरा चारा नष्ट हो गया है। सूखे चारे से पशुओं का पेट भरा जा रहा है, अब घरों में रखा सूखा चारा भी खत्म होने लगा है। ऐसे में पानी से घिरे गांवों में पशुओं के चारे का संकट खड़ा हो गया है। संपर्क मार्ग डूबे होने की वजह से पशुपालक बाहर से सूखे चारे का भी इंतजाम नहीं कर पा रहे हैं।
बाढ़ प्रभावित गांवों में लोगों की आवाजाही के लिए 12 नाव लगाई गई हैं। राहत और बचाव कार्य के लिए तहसील प्रशासन सतर्क है। पशुओं के लिए सूखे चारे की व्यवस्था भी कराई जा रही है।
- योगेंद्र पांडेय, तहसीलदार, धनघटा