संतकबीरनगर। जिले में करीब ढाई लाख किसान हैं। राजनीतिक दल किसानों की खुशहाली के लिए तरह-तरह के दावे कर रहे हैं लेकिन अन्नदाता इस पर विश्वास नहीं कर पा रहा। वजह यह कि सरयू नदी की हालत तीन दशक बाद भी नहीं बदली। इधर दो वर्षों से छुट्टा पशुओं ने फसल को बर्बाद कर दिया। चीनी मिल की बंदी के चलते गन्ने की खेती भी मुसीबत बनी हुई है। ऐसे में अन्नदाता को अब भी मसीहा का इंतजार है।
लोकसभा चुनाव में किसानों को लुभाने के लिए हर दल ने कमर कस ली है। जहां भाजपा 2022 तक किसानों की आय दो गुना करने की बात कह रहीं है, वहीं किसान सम्मान निधि के जरिए साल में छह हजार देने की बात कर रही है। किसानों के हमदर्द का होने की बात सपा-बसपा गठबंधन भी कर रहा है तो कांग्रेस भी घोषणा पत्र में वादे कर लुभाने का प्रयास कर रही है। इस सबके बीच किसानों को अब भी ऐसे मसीहा का इंतजार है जो किसानों का दर्द दूर कर सके। जिले में अन्नदाता तीन दशक से सरयू नहर परियोजना पूरा होने का इंतजार कर रहे हैं लेकिन अब भी खेतों में पानी पहुंचाने का इंतजाम नहीं हो सका है। परियोजना की शुरूआत में किसान काफी खुश थे कि सरयू नहर परियोजना खेतों में सिंचाई की समस्या का समाधान हो जाएगा लेकिन इंतजार इतना लंबा हो गया है कि अब किसानों को किसी की बात पर विश्वास ही नहीं हो रहा है। सूबे में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भाजपा की सरकार आई तो किसानों के सिर पर एक और मुसीबत आ गई। छुट्टा पशु खेती को बर्बाद करने लगे। किसानों को रातभर जागकर फसल की रखवाली करनी पड़ रही है। सरकार आश्वासन दे रही है कि जल्द ही छुट्टा पशुओं की समस्या से राहत मिल जाएगी। आदेश भी आए कि छुट्टा पशुओं को रखने की व्यवस्था की जाए। कुछ जगह काम भी हुए लेकिन सिर्फ खानापूर्ति हुई। गन्ना मिल बंद होने से भी किसान परेशान हैं। किसान राम दरश ने कहा कि सभी राजनीतिक दल भले ही किसानों के हित के कदम उठाने की बात कर रहे हैं लेकिन अब भी किसानों को उनका हक नहीं मिल रहा है।