हरिहरपुर। बारिश की बेरुखी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खेतों में रोपी गई धान की फसलें पानी के बिना सूखने लगी है। किसी तरह से गेहूं की फसल बेचकर धान बोया, लेकिन बारिश न होने से अब उनके सामने सिंचाई का संकट आ गया है।
उन्हें समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर कहां से डीजल का इंतजाम कर खेतों की सिंचाई की जाए। इसके लिए कई किसान कर्जदार बन गए हैं तो वहीं कुछ आसमान की तरफ टकटकी लगाए हुए हैं।
इस समय बारिश किसानों के अरमानों पर पानी फेर रही है। क्षेत्र के किसान हनुमान पटेल बताते हैं कि धान की रोपाई में लागत काफी बढ़ गई है। किसानों ने गेहूं बेचकर किसी तरह से धान बोया। कर्ज लेकर खेतों में खाद डाली।
अब खेतों में पानी चलवाने का संकट खड़ा हो गया है। डीजल महंगा है, आखिर इतना पैसा कहां से लाएं कि पंपिंग सेट में डीजल भरवाकर फसल को बचाया जा सके। करीब सप्ताह भर से बारिश न होने से खेत में रोपी गई धान की फसलें सूख रही हैं। खेतों ने दरारें पड़ने लगी हैं। रोपाई में लागत लगाकर कर कर्जदार हो गए किसान अब परिवार के भरण पोषण को लेकर चिंतित हैं।
महुली, नाथनगर, हरिहरपुर क्षेत्र के सैकड़ों गांव के किसान बारिश न होने से परेशान हैं। उनका कहना है कि बीते अषाढ़ के महीने में भी बारिश बहुत कम हुई अभी तक गांव के तालाब पोखरे पानी से नहीं भरे हैं। लोगों को उम्मीद थी कि सावन के महीने में बारिश होगी, लेकिन सावन भी दो दिन बीत चुका है। संभावना दिखाई दे रही है, लेकिन बारिश न होने से मुश्किल बढ़ती जा रही है। किसान अशोक चौधरी कहते हैं कि अगर बारिश नहीं होती है तो धान की फसल को बचाना मुश्किल हो जाएगा। डीजल खरीदकर सिंचाई करके धान की फसल को कहां तक बचाई जा सकती है।
दीपेंद्र पटेल कहते हैं कि रोपाई और खाद की ही लागत इतनी है कि किसान टूट गया है। समय पर बारिश न होने से उसकी कमर भी अब टूट रही है। चंद्रमणि त्रिपाठी कहते हैं कि फसल बो दी गई है तो अब उसको अपनी आखों के सामने सूखते हुए भी तो नहीं देख सकते।