संतकबीरनगर। राजस्थान के झालवाड़ा जिले में स्कूल की छत गिरने से आठ बच्चों की माैत हो गई। कई बच्चे घायल भी हुए। ऐसा हादसा गोरखपुर में भी हो सकता है। हादसे के बाद भी जिले में 70 से अधिक परिषदीय स्कूल जर्जर भवनों में संचालित किए जा रहे हैं।
इनमें किसी की दीवार दरक गई है तो किसी की छत का प्लास्टर झड़ रहा है। किसी की छत की सरिया भी दिखने लगी है। कई भवनों की छतें बारिश में टपकती हैं। जो भवन जर्जर है, उसे भी नहीं गिराया गया।
बच्चे वहां भी खेलने पहुंच जाते है। इन जर्जर भवनों में हजारों बच्चे बेहतर भविष्य के लिए जिंदगी दांव पर लगाकर पढ़ाई कर रहे हैं। यदि जिम्मेदार नहीं चेते तो राजस्थान के झालावाड़ जैसी घटना यहां भी हो सकती है।
जनपद में बेसिक शिक्षा परिषद के 1247 प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं। इन विद्यालयों में करीब 1.03 लाख बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। मिशन कायाकल्प योजना के तहत सभी भवनों की मरम्मत, निर्माण और रंगाई-पुताई आदि का कार्य कराया गया, लेकिन अधिकतर विद्यालय पर जिम्मेदारों का करम नहीं हुआ। राजस्थान के झालावाड़ में हुए हादसे के बाद एक बार फिर जर्जर स्कूल की सूची शासन ने तलब की है। शासन के निर्देश पर दो वर्ष पहले जिले में 204 जर्जर विद्यालय चिह्नित किए गए थे।
इसमें से कुछ को गिरा दिया गया, लेकिन अभी भी कई विद्यालय वैसे ही पड़े हुए है। आंकड़ों पर गौर करे तो अभी भी 70 के करीब विद्यालय जर्जर हालात में है। इसकी सूची खंड शिक्षा अधिकारियों से मांगी है।