संवाद न्यूज एजेंसी
धनघटा। गांव में मनरेगा कार्यों की मॉनिटरिंग करने वाले रोजगार सेवक सात माह से मानदेय न मिलने से आर्थिक तंगी से परेशान हैं। रोजगार सेवकों का कहना है कि मानदेय न मिलने की वजह से अब इस तरह की नौकरी से जी भर गया है।
रोजगार सेवक छोटे लाल यादव, सुभाष, पाराशर मिश्र, दयाराम, झिंकन आदि का कहना है कि रोजगार सेवक गांव में मनरेगा मजदूरों को रोजगार दिलाने के साथ-साथ उनकी हाजिरी लगाता है। इसके अलावा ग्राम प्रधान और ब्लॉक के अधिकारियों द्वारा दिए जाने वाले कार्य किया करता है। इसमें उनका पूरा दिन का समय व्यतीत हो जाता है। रोजगार सेवक का मानदेय तब मिलता है। जब मनरेगा कार्यों का भुगतान होता है।
इसमें सात से आठ माह तक का समय व्यतीत हो जाता है। रोजगार सेवकों ने कहा कि इससे अच्छा तो बेरोजगार रहना ही ठीक है। इस तरह की नौकरी करने से क्या फायदा जब मजदूरी समय पर नहीं मिलने वाली है।