मेंहदावल तहसील क्षेत्र के करमैनी-बेलौली बंधे की हालत वर्तमान में काफी दयनीय है। हालात यह है कि 19 किलो मीटर इस तटबंध पर जगह-जगह रेनकट और रैटहोल हैं। इनकी मरम्मत नहीं गई। इससे बरसात शुरू होते ही बंधे के किनारे बसे गांवों के लोगों की नींद उड़ी हुई। वहीं दूसरी ओर इन लोगों में जनप्रतिनिधियों और अफसरों के प्रति नाराजगी भी है।
ब्लॉक में 19 किमी लंबा करमैनी-बेलौली बंधा विभागीय देखरेख के अभाव में जर्जर हालत में पहुंच गया है। बंधे की बीचोबीच बने होल व रेनकेट बंधे को कमजोड़ साबित कर रहे हैं। 1998 की बाढ़ झेलने वाली मेंहदावल पूर्वीय-उत्तरीय कछार क्षेत्र की जनता वर्तमान में बंधे की हालत देखकर भयभीत है। 0 से आठ किलोमीटर के बीच बड़ी संख्या में रेनकेट व बैक होल बंधे पर स्पष्ट दिखाई दे रहे है। हालात यह है कि 19 किलो मीटर लंबे इस तटबंध पर जोरवा गांव के समीप जहां कटान के स्थान पर अब भी काम शेष है।
वहीं विशुनपुर बांगर खैरा माई के स्थान बेलौली आदि स्थानों पर अब भी कटान से बचने के पर्याप्त उपाय विभाग द्वारा नहीं किए गए है। बेलौली गांव की आबादी वाली क्षेत्र में पिछली बार कटान स्थल पर अब तक विभाग की पहल न होने से लोगों में असंतोष व्याप्त है। पूरे बंधे पर जगह - जगह जंगल - झांडी रेनेकट, बैक होल तटबंध की पहचान को उजागर कर रहे हैं।
क्षेत्र के देवेंन्द्र पाठक, देवेंन्द्र बहादुर सिंह, मानवेन्द्र प्रताप सिंह, एडवोकेट राजेश तिवारी, संजय तिवारी, बैजनाथ यादव, बैजनाथ तिवारी आदि का कहना है कि ड्रेनेज खंड द्वितीय द्वारा करमैनी - बेलौली तटबंध की सुरक्षा के लिए अभी तक कोई पहल नहीं की गई है। बरसात का मौसम करीब है ऐसे में जल स्तर बढ़ा तो तटबंध पर दबाव बढ़ जाएगा और भयावह तबाही से क्षेत्रीय लोगों को धन जन की हानि उठानी पड़ेगी।
अधिशाषी अभियंता दिनेश त्रिपाठी का कहना है कि बंधों की पूरी निगरानी की जा रही है। कही से कोई भी बंधा कमजोर नहीं है। बावजूद विभाग पूरी तरह से सतर्क है।