सेमरियावां। माह-ए-रमजान का दूसरा अशरा चल रहा है। इसको मगफिरत का अशरा कहा जाता है। इसलिए रोजेदारों ने इस अशरे में अपनी इबादतों में इजाफा कर दिया है। साथ ही गुनाहों से तौबा और माफी तलाफी कर रहे हैं। रोजेदारों का ज्यादा समय मस्जिदों में पाबंदी के साथ पांच वक्त की नमाज और अन्य इबादतों के साथ ही कुरान की तिलावत में बीत रहा है। इस दौरान हदीस के हवाले से मुकद्दस रमजान माह की फजीलत भी बयान की जा रही है।
जामिया अरबिया उमर फारूक दरियाबाद के मौलाना रहमतुल्लाह नूर कासमी ने कहा कि रमजान का महीना मजहबी और दुनियावी तौर पर वक्त की पाबंदी, सच्चाई की कद्र, परहेजगारी, बड़ों का आदर, गरीबों पर रहम आदि समेत कई चीजें सिखाता है। रोजेदार को सारी बुराइयों से दूर रहना चाहिए। इससे अल्लाह अपने बंदे से राजी हो जाता है, और उसके अगले और पिछले सब गुनाह माफ कर दिए जाते हैं।
उन्होंने कहा कि मुकद्दस माह-ए-रमजान अजमत, रहमत और बरकतों से भरा है। इस महीने को तीन अशरों में बांटा गया है। हर अशरा दस-दस दिनों का होता है। पहला अशरा खुदा की रहमत वाला है। इसमें अल्लाह की रहमत नाजिल होती है। इस अशरे में ज्यादा से ज्यादा इबादत की जानी चाहिए। वहीं दूसरा अशरा गुनाहों से माफी मांगने का होता है।
इस अशरे में अल्लाह से अपने गुनाहों की रो-रोकर माफी मांगनी चाहिए। जबकि तीसरा अशरा जहन्नुम से खलासी का है। इस अशरे में जहन्नुम की आग से अल्लाह की पनाह मांगना चाहिए। साथ ही ज्यादा से ज्यादा इबादत के साथ कुरआन पढ़नी चाहिए। इसके अलावा नफिल नमाज पढ़नी चाहिए। अन्य महीनों में भी इसकी पाबंदी करनी चाहिए।
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बाजारों में बढ़ी रौनक
पवित्र महीना रमजान में सेमरियावां क्षेत्र के करही, सेमरियावां, दुधारा, चिउटना, उसराशहीद, बाघनगर, दानोकुइयां, नव्वागांव, कोहरियावां, सालेहपुर, टेमारहमत आदि विभिन्न गांवों के चौराहे व बाजारों में अलग ही रौनक देखने को मिलती हैं । इन जगहों पर फलों और सेवई की दुकानें सजने लगी हैं। रमजान के दौरान रोजेदारों के लिए इफ्तार का विशेष महत्व होता है। इसी को ध्यान में रखते हुए दुकानदार भी खास तैयारी करते हैं। बाजारों में सेब, केला, अंगूर, अनार, संतरा, पपीता, तरबूज, खीरा जैसे फलों की मांग अचानक बढ़ जाती है। वहीं खजूर की कई किस्में देशी से लेकर आयातित दुकानों की शान बन जाती है।