जिला पंचायत की बैठक में मौजूद जिला पंचायत अध्यक्ष व अन्य
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सत्ता परिवर्तन के साथ ही जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी को लेकर सियासी रार शुरू हो गई है। शनिवार को जिला पंचायत बोर्ड की बैठक विकास भवन में बुलाई गई थी। जिला पंचायत अध्यक्ष संतोष यादव व अधिकारी समय से पहुंचे और सदस्यों का इंतजार करते रहे, लेकिन निर्धारित समय के बाद भी अध्यक्ष सहित मात्र दस सदस्य ही पहुंचे, जबकि कोरम के लिए 17 सदस्यों की जरूरत थी। ऐसे में मजबूरन बैठक स्थगित कर दी गई। इस बीच अध्यक्ष के विरोधी खेमे ने उन पर सदस्यों की अनदेखी का आरोप लगाया है।
अपर मुख्य अधिकारी रामाश्रय ने बताया कि पूर्व में 21 अप्रैल को जिला पंचायत बोर्ड की बैठक बुलाई गई थी, लेकिन नाथनगर में विवाद के चलते तिथि टालकर 29 अप्रैल कर दी गई। शनिवार को अपराह्न एक बजे से बैठक तय थी, निर्धारित समय पर जिला पंचायत अध्यक्ष संतोष यादव कुछ सदस्यों के साथ पहुंच गए। अधिकारी भी आए गए थे, लेकिन अध्यक्ष समेत दस सदस्यों को छोड़कर कोई अन्य सदस्य बैठक में नहीं आया। काफी देर तक सदस्यों का इंतजार होता रहा। बाद में अपर मुख्य अधिकारी ने कोरम का अभाव बताते हुए बैठक टालने की बात कहीं।
उन्होंने कहा कि कोरम के लिए 17 सदस्यों का होना जरूरी है, लेकिन अध्यक्ष समेत मात्र दस सदस्य ही बैठक में पहुंचे। उन्होंने कहा कि अगली बैठक की तिथि बाद में तय की जाएगी। इस बीच विरोधी गुट के नेता एवं जिला पंचायत सदस्य अशोक चौधरी ने कहा कि अध्यक्ष ने कुर्सी संभालते ही सदस्यों के साथ अभद्रता की।
मनमाने ढंग से टेंडर कराकर अपने लोगों को काम दिया। सदस्यों को विकास कार्य के लिए भी विश्वास में नहीं लिया गया। ऐसे में अब बैठकों में शामिल होने का कोई औचित्य ही नहीं है। जिला पंचायत अध्यक्ष संतोष यादव ने दावा किया कि बैठक में 13 सदस्य पहुंचे थे, लेकिन शादी विवाह की वजह से अन्य सदस्य नहीं पहुंच पाए। कोरम पूर्ति के अभाव में बैठक को स्थगित कर कर दिया गया। वैैसे सदस्य अशोक चौधरी द्वारा जो आरोप लगाए जा रहे हैं, वे निराधार हैं।