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Sant Kabir Nagar News: एफआईआर के 14 माह बाद छात्रवृत्ति अनियमितता की जांच से मचा हड़कंप

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संतकबीरनगर/महुली। अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति योजना में वित्तीय अनियमितता का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। एफआईआर के 14 माह बाद जांच तेज होने से हड़कंप मचा हुआ है। 46 शैक्षिक संस्थानों के 98 लोगों के खिलाफ 19 जून 2025 को कोतवाली में एफआईआर दर्ज हुआ था। करीब 3.25 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति अनियमितता का मामला है। जिन लाभार्थियों के बैंक खातों में छात्रवृत्ति की रकम पहुंचने की बात सामने आई है, उनका पुलिस बयान दर्ज कर रही है। पुलिस संबंधित छात्रों के आधार, बैंक खाता और शाखा संबंधी विवरण भी जुटा रही है।
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बतादें कि जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी प्रवीण कुमार मिश्रा की ओर से 19 जून 2025 को कोतवाली खलीलाबाद में तहरीर दी गई थी। जिसके बाद मामले में प्राथमिकी दर्ज हुई थी। तहरीर के मुताबिक, भारत सरकार की अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति योजना के वर्ष 2021-22 और 2022-23 के संदिग्ध शैक्षिक संस्थानों और उनमें दर्ज छात्र-छात्राओं की सूची के आधार पर सत्यापन कराया गया था। जिलाधिकारी के निर्देश पर संबंधित खंड शिक्षा अधिकारियों और अन्य अधिकारियों से संस्थानों तथा छात्रों का निरीक्षण और सत्यापन कराया गया। जांच में प्रथमदृष्टया 46 शैक्षिक संस्थानों में छात्रवृत्ति वितरण में व्यापक वित्तीय अनियमितता प्रतीत होने की बात तहरीर में दर्ज है।
तहरीर में यह भी कहा गया है कि शासन स्तर से ऐसे संस्थानों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने के निर्देश दिए गए थे, जिनका अस्तित्व जांच में नहीं मिला अथवा जिनमें छात्रवृत्ति वितरण में अनियमितता पाई गई। इसके बाद संबंधित संस्थानों के इंस्टीट्यूट नोडल ऑफिसर (आईएनओ) और हेड ऑफ इंस्टीट्यूट (एचओआई) समेत छात्रवृत्ति की अनियमितताओं में संलिप्त लोगों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
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3,25,96,960 रुपये की छात्रवृत्ति पर उठे सवाल
दस्तावेज में 46 शैक्षिक संस्थानों से जुड़ी कुल 3,25,96,960 रुपये की छात्रवृत्ति के वितरण में प्रथमदृष्टया व्यापक वित्तीय अनियमितता का उल्लेख है। इसी आधार पर संबंधित संस्थानों, आईएनओ, एचओआई और अनियमितता में शामिल बताए गए लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने की कार्रवाई की गई। एफआईआर में अलग-अलग संस्थानों के आईएनओ और एचओआई के नाम भी दर्ज हैं। सूची में धनघटा, भैंसाटीकर, जयरामपट्टी, हरिहरपुर, सेमरडाड़ी, बेलहरकला समेत जिले के कई क्षेत्रों के शैक्षिक संस्थान शामिल हैं।

गांवों में पहुंचकर खाताधारकों के बयान ले रही पुलिस
अब निदेशालय स्तर से सख्ती के बाद विवेचना में तेजी आई है। धनघटा तहसील के पौली, पारा, नावन, करमा और महुली थाना क्षेत्र के छितही गांव समेत अन्य इलाकों में उन लाभार्थियों से पूछताछ की जा रही है, जिनके खातों में छात्रवृत्ति की रकम पहुंचने की बात सामने आई है। रविवार को मामले के विवेचक कोतवाली खलीलाबाद के एसएसआई प्रमोद कुमार यादव छितही गांव पहुंचे और लाभार्थियों के बयान दर्ज किए। विवेचक ने जिला अल्पसंख्यक कल्याण कार्यालय से संबंधित छात्रों के आधार नंबर, बैंक खाते और बैंक शाखा का विवरण भी मांगा है। इससे अब यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि छात्रवृत्ति की रकम वास्तव में किन खातों में पहुंची और उसका आगे क्या हुआ।

रिकॉर्ड और छात्रों के सत्यापन पर भी सवाल
जांच के दौरान कई संस्थानों में छात्रवृत्ति से संबंधित अभिलेख और छात्रों की उपस्थिति से जुड़े रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आने का दावा किया गया है। करीब चार हजार छात्रों के नाम पर आवेदन और उनके अभिलेखों के सत्यापन को लेकर भी सवाल उठे हैं। जांच में कई नाम, आधार और मोबाइल नंबर संदिग्ध पाए जाने की बात कही जा रही है। हालांकि इन बिंदुओं की अंतिम पुष्टि पुलिस की विवेचना और संबंधित अभिलेखों की जांच के बाद ही होगी।

यू-डायस कोड निलंबित कराने की तैयारी
मामले में कार्रवाई का दायरा अब सिर्फ एफआईआर तक सीमित नहीं है। 46 चिह्नित संस्थानों के यू-डायस कोड निलंबित कराने के लिए महानिदेशक स्कूल शिक्षा को पत्र भेजे जाने की प्रक्रिया शुरू होने की जानकारी सामने आई है। इससे संबंधित संस्थानों के संचालन और भविष्य पर भी असर पड़ सकता है।

एफआईआर में 98 नाम, जांच के बाद खुलेगा पूरा राज
एफआईआर की सूची में 46 संस्थानों से जुड़े कुल 98 लोगों के नाम दर्ज हैं। दस्तावेज में अलग-अलग संस्थानों के आईएनओ और एचओआई का विवरण भी दिया गया है। अब पुलिस लाभार्थियों के बयान, बैंक खातों, आधार विवरण और संस्थानों के अभिलेखों का मिलान कर रही है। जांच आगे बढ़ने के साथ यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि छात्रवृत्ति की रकम किन परिस्थितियों में जारी हुई और इसमें किस स्तर पर अनियमितता हुई। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मामले की गहन विवेचना की जा रही है। साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

छात्रवृत्ति से संबंधित मामले की जांच की जा रही है। लाभार्थियों का बयान दर्ज किया जा रहा है। जांच में जो तथ्य सामने आएंगे उसे विवेचना में शामिल किया जाएगा।
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- प्रियम राजशेखर पांडेय, सीओ खलीलाबाद
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