उर्स में निजामी कांफ्रेंस के दौरान मौजूद उलेमा ए कराम।
सेमरियावां। ब्लाॅक के ग्राम अगया में हजरत सूफी निजामुद्दीन साहब के 11 वें उर्स के मौके पर उनकी मजार पर बृहस्पतिवार को कुल शरीफ के बाद दो दिन से चल रहे सालाना उर्स कार्यक्रम का समापन हुआ। इस दौरान अकीदतमंदों ने मजार पर फातेहा पढ़ कर मुल्क में अमन और शांति की दुआ मांगी।
सुबह आठ बजे सज्जादानशीन मौलाना हबीबुर्रहमान के नेतृत्व में अकीदतमंद एकत्रित हुए। इस दौरान सामूहिक रूप से लोगों ने फातेहा सलाम पढ़ा। अकीदतमंदों ने खुदा से अपनी समस्याओं के समाधान और मुल्क में अमन व शांति की दुआ मांगी। इससे पहले बुधवार की रात में इशा की नमाज के बाद निजामी कांफ्रेंस का आयोजन किया गया। इस दौरान देश के कई प्रसिद्ध इस्लामिक विद्वानों ने शिरकत किया। वक्ताओं ने कहा कि समाज में शिक्षा को बढ़ावा दें। आपस में एकता और सद्भाव का माहौल बनाएं। आपसी झगड़ों से दूर रहें। अपनी धार्मिक समस्याओं के समाधान के लिए धार्मिक विद्वानों से सलाह लें। लड़के और लड़कियों के लिए धार्मिक प्रशिक्षण की व्यवस्था करें, रोजा और उपवास रखें। कार्यक्रम की शुरुआत मुहद्दिस कबीर अल्लामा जिया अल-मुस्तफा निजामी ,अल्लामा सैयद अशफाक अहमद, मुफ्ती सदरुलवरा कादरी मिस्बाही, मौलाना मुफ्ती अख्तर हुसैन अलीमी, मुफ्ती अहमद रजा निज़ामी, मौलाना अमजद अली आदि वक्ताओं द्वारा तकरीर किया गया। सज्जादानशीन मौलाना हबीबुर्रहमान ने कहा कि इस्लामी तालीमात पर पूरी तरह अमल करके हम दीन और दुनिया की कामयाबी हासिल कर सकते हैं। औलिया-ए-कराम ने अपनी अपने अमल के जरिए इस्लामी तालीमात को लोगों तक पहुंचाया। कहा कि हजरत सूफी निजामुद्दीन साहब की पाकीजा जिंदगी हमारे लिए एक मिसाल है। तालीम ही कौम की तरक्की का पैमाना है। जो तालीम से दूर होता है। वह धीरे-धीरे अखलाकी गिरावट का शिकार हो जाता है। तालीम की कमी किसी कौम की रुसवाई का सबब बनती है। इस दौरान मौलाना मुहम्मद अली निज़ामी, मुफ़्ती कमाल अहमद अलीमी, मुफ़्ती आलमगीर मिसबाही, हज़रत मौलाना मुहम्मद हबीबुर रहमान मिस्बाही, मौलाना अब्दुल रहमान मिस्बाही आदि मौजूद रहे।