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बिजली कटौती से पॉवरलूम की थमी रफ्तार, बुनकर बेहाल

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बिजली कटौती से पॉवरलूम की थमी रफ्तार, बुनकर बेहाल
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- 24 घंटे में महज आठ से दस घंटे ही मिल पा रही बिजली
- आधू-अधूरे तैयार कपड़ों को लेकर परेशान हैं बुनकर
अमर उजाला ब्यूरो
बखिरा/संतकबीरनगर। बिजली कटौती से पॉवरलूमों की रफ्तार थम गई है। इससे बुनकरी के कारोबार से जुड़े लोग बेहाल हैं। बुनकरों की पीड़ा है कि महज आठ से दस घंटे ही बिजली मिल पा रही है। वह भी बीच-बीच में बिजली की आवाजाही से पावरलूम ठीक से चल नहीं पा रहे हैं। आधे-अधूरे तैयार हुए कपड़े महज गट्ठर बनकर रह गए है। यहीं हाल रहा है तो उनके समक्ष आर्थिक संकट खड़ा हो जाएगा।
बुनकर इशहाक अंसारी ने बताया कि बखिरा क्षेत्र के अमरडोभा, लेडुआ-महुआ, तरकुलवा, हरदी, नौरो, ढोढ़या, सईबुजुर्ग में बुनकरी का कार्य दशकों पुराना है। सैकड़ों लोग इस धंधे से जुड़कर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। पिछले 15 दिनों से बिजली कटौती से पॉवरलूम ठीक से चल नहीं पा रहे हैं। आठ से दस घंटे ही बिजली बमुश्किल मिल पा रही है। बुनकरों के लिए अलग फीडर से बिजली की निर्बाध आपूर्ति होनी चाहिए, लेकिन जिम्मेदार इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। बिजली देने और कटने का समय निर्धारित नहीं है। ऐसे में कपड़े भी आधे-अधूरे ही तैयार हैं। इन अधूरे निर्मित कपड़ों को बाजार में भी बेचा नहीं जा सकता है। पूंजी फंसने से उनकी आर्थिक स्थिति खराब हो गई है।
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बुनकर मुश्ताक अहमद ने कहा कि कच्चे माल की कीमत काफी बढ़ गई है। इसी के साथ बिजली की किल्लत से पॉवरलूम भी बंद पड़ा हुआ है। चौबीस घंटे में मात्र आठ से दस घंटे ही बिजली मिल रही है। रात हो या दिन कभी भी अनवरत बिजली की आपूर्ति नहीं हो रही है। 24 घंटे बिजली देने का सरकारी दावा हवाई साबित हुआ है। बिजली निगम की मनमानी से दर्जनों पॉवरलूम बंद पड़े हैं। कारोबार ठप होने से अब आर्थिक समस्या पैदा हो गई है।
हाजी शहरयार ने कहा कि सूत के दाम बढ़ने से कारोबार पर वैसे ही ठप पड़ा हुआ है। साथ ही बिजली की अनियमित कटौती ने बुनकरों की कमर तोड़ दिया है। दिन हो या रात बिजली के आने-जाने का कोई निर्धारित समय नहीं है। भीषण गर्मी से लोग घरों में बिलबिला रहे हैं। बुनकर कारीगर भी बिजली कटौती से तंग आ गए हैं।
बुनकर मो. शमी ने कहा कि एक दशक पहले तक बुनकरी का धंधा अच्छा था। उसके बाद सूत की कीमतों में बढ़ोतरी होने से छोटे बुनकर महंगाई का शिकार हो गए। लूम बेचकर मजदूरी करने लगे, लेकिन अब बिजली की अघोषित कटौती से हालात अधिक बदतर हो गए हैं। बिजली नहीं होने से कारोबार ठप है। पूरे दिन बुनकर बिजली का इंतजार करते हैं। हाल यह है कि बदहाल बिजली ने बुनकरी के धंधे को ही चौपट कर दिया है।
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डीएम दिव्या मित्तल ने कहा कि बिजली की समस्या है। ग्रामीण क्षेत्रों में महज दस घंटे ही बिजली मिल पा रही है। समस्या के समाधान के लिए बिजली निगम के अधिकारियों से वार्ता की गई है। उम्मीद है कि जल्द ही बिजली व्यवस्था पटरी पर लौट आएगी। इससे आमजन के साथ कारोबारियों को भी सहूलियत होगी।
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