गोरखपुर/संतकबीरनगर। डॉ. अनुज सरकारी और उनके कर्मचारियों पर पुलिस मेहरबानी दिखा रही है। सिविल कोर्ट ने आदेश दिया तो कोरम पूरा करने के लिए आखिरी दिन हल्की धारा में केस दर्ज कर लिया गया। इसमें डॉक्टर और कर्मचारियों की गिरफ्तारी नहीं हो सकती है। यह आरोप सिपाही के पिता सेवानिवृत दरोगा चंद्रदेव ने लगाए हैं। बताया कि 14 गंभीर धारा में केस दर्ज करने के लिए कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया गया था।
चिकित्सक और उनके कर्मचारियों की ओर से पीटे जाने वाले कोतवाली खलीलाबाद क्षेत्र के मंझरिया गंगा निवासी सिपाही पंकज के पिता चंद्रदेव मंगलवार को घर पर उदास बैठे थे। चंद्रदेव पुलिस विभाग में दारोगा पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। पुलिस विभाग में चालीस साल की सेवा देने वाले चंद्रदेव बताते हैं कि डॉक्टर का पुलिस पर इतना प्रभाव है कि बेटे और बहू पर अत्याचार किया गया। इसके बाद भी बेटे पर ही केस दर्ज कराकर उसे जेल भिजवा दिया गया। बेटे-बहू के साथ हुई घटना को दबा दिया।
चंद्रदेव ने बताया कि केस दर्ज कराने के लिए न्यायालय में 17 जनवरी को बहस हुई। इसके बाद 18 जनवरी को कोर्ट की तरफ से न्यायाधीश ने केस दर्ज करने का आदेश दे दिया।
फिर भी पुलिस मामले में केस दर्ज करने से कतराती रही। जब न्यायालय की ओर से दिए गए दो सप्ताह का समय बीत गया और लगा कि अब कोर्ट की अवमानना झेलनी पड़ेगी, तब केस दर्ज किया गया। जो पुलिस हमारा केस ही नहीं दर्ज कर रही थी, वह पुलिस निष्पक्षता से मामले की विवेचना कैसे करेगी। अगर ठीक से विवेचना हो जाए तो अभी और भी धाराएं हमारे केस में बढ़ेंगी।
उन्होंने बताया कि बेटा पंकज जेल से रिहा होने के बाद परिवार के लोगों को सांत्वना देने के साथ खुद भी शांत होने का प्रयास कर रहा है। वह अभी तक ड्यूटी पर नहीं जा सका है। बहाली के लिए वह आवश्यक प्रयास कर रहा है।