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‘साहेब बंदगी... इहां आकर बहुत नीक लागत बा...’

Thu, 28 Jun 2018 11:47 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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मगहर में प्रधानमंत्री को शाल देकर सम्मानित करते मुख्यमंत्री। - फोटो : अमर उजाला
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संतकबीरनगर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को मगहर में कबीर के 500वें निर्वाण दिवस पर उनकी समाधि और मजार पर मत्था टेका। उन्होंने 24 करोड़ की लागत से बनने वाली कबीर अकादमी का शिलान्यास किया।
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इसके बाद जनसभा को संबोधित किया। अपने समूचे कार्यक्रम के दौरान पीएम मोदी विरोधियों के लिए बड़ी लकीर खींच गए। उन्होंने संतों की समृद्ध परंपरा की चर्चा करते हुए सामाजिक समरसता का संदेश तो दिया ही, विपक्षियों पर तंज कसने से भी नहीं चूके। 

प्रधानमंत्री ने अपने भाषण की शुरुआत भोजपुरी से की। बोले- ‘साहेब बंदगी, कबीर दास के स्मृति कार्यक्रम मेें आइल बानी, इहां आकर बहुत नीक लागत बा...।’ उनका यह अंदाज पूरब की धरती के लोगों के दिलों को छू गया। पीएम ने कहा कि कबीर स्थली पर आऊं, यह मेरी वर्षों से कामना थी, जो आज पूरी हुई।
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फिर उन्होंने एक दार्शनिक की तरह समझाया कि कबीर ने कहा था तीर्थ जाने से एक पुण्य मिलता है, लेकिन संत की संगत से चार पुण्य मिलते हैं। यहां आना पुण्य देने वाला है। उन्होंने खुद को कबीर को जोड़ा। पीएम ने ‘सबका साथ-सबका विकास’ के नारे को कबीर वाणी से जोड़ते हुए कहा कि भाजपा सरकार उनके बताए इसी रास्ते पर चलकर सभी मजहब और जाति के लोगों का विकास कर रही है। 

विपक्षी दलों पर हमला करते हुए कहा कि कुछ राजनीतिक दल शांति नहीं अशांति चाहते हैं, ताकि राजनीतिक लाभ मिल सके, लेकिन उन्हेें नहीं पता कि उनकी जमीन खो चुकी है। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने कबीर को ठीक से पढ़ा ही नहीं।

उन्होंने कबीर का दोहा सुनाया- ‘पोथी पढ़ पढ़कर जग मुआ, पंडित भया न कोय, ढाई आखर प्रेम का पढ़े सो पंडित होय।’ फिर प्रदेश की पूर्ववर्ती सरकार को कटघरे में खड़ा किया। कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए गरीबों की संख्या तक नहीं बता पाई पिछली सरकार। हाथ पर हाथ धरे बैठी रही। योगी जी ने रिकॉर्ड आवास बनवाकर कबीर के उसूलों को महत्व दिया। 

पीएम ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि आपातकाल लगाने वाले और उनके साथ कुछ लोग कुर्सी झपटने के लिए घूम रहे हैं। किसी को परिवार की चिंता है तो किसी को अपनी राजनीति की। तीन तलाक के मुद्दे पर मुस्लिम महिलाओं को साधने की कोशिश की और बिल पास न होने पर विपक्ष को कोसा।

कबीर को कर्मयोगी बताते हुए प्रधानमंत्री ने विकास से जोड़ा। कहा कि कबीर कर्म में विश्वास करते थे और मेरी सरकार भी कर्म करते हुए विकास कर रही है। पूर्व राष्ट्रपति डॉ. अब्दुल कलाम का जिक्र करते हुए कहा कि उनका सपना था कबीर को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर और पहचान मिले। अब यह काम हो रहा है।
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