- रंग गुलाल से सज गए बाजर, हर्बल रंगों की डिमांड अधिक
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। होली पर्व को लेकर रंग, गुलाल का बाजार सज गया है। इस बार हर्बल गुलाल के साथ इको फ्रेंडली रंगों की डिमांड है। दुकानदारों का कहना है कि हर्बल गुलाल की ज्यादा मांग है, लोग बढ़-चढ़ कर इन रंगों को खरीद रहे है।
बाजार में हर्बल गुलाल पीले, हरे, लाल, गुलाबी और केसरिया रंगों में मिल रहे हैं। बाजार में हर्बल गुलाल 100 से 500 रुपये तक बिक रहा है। दुकानदार सुनील कसौधन ने बताया कि बाजारों में 70 फीसदी हर्बल रंग बिक्री के लिए लाए गए हैं। अधिकतर दुकानदार भी अब इन्हीं रंगों को बेचने लगे हैं। शहर में इस बार करीब 30 क्विंटन से अधिक गुलाल बिक्री के लिए लाया गया है। दुकानदार बताते हैं कि हर्बल गुलाल में किसी भी प्रकार का कोई केमिकल नहीं होता है। हर्बल गुलाल शुद्ध रूप से वनस्पति से तैयार होता है। इससे चर्म रोग का डर भी नहीं रहता है।
ऐसे पहचानें रासायनिक हर्बल गुलाल
गुलाल खरीदते वक्त सुंघ कर देखें। अगर उसमें किसी केमिकल या पेट्रोल की गंध आती है तो उसे न खरीदें। किसी भी तरह की गंध उसमें मिली केमिकल की पहचान हो सकती है। जबकि आम तौर पर हर्बल रंगों में खुशबू होती है। अगर खुशबू न हो तो कोई गंध नहीं होता लेकिन ये केमिकल से अलग होती है। खरीदते समय थोड़ा सा गुलाल पानी में घोल कर देखें। अगर गुलाल पानी में नहीं घुलता है तो हो सकता है कि उसमें केमिकल हो। ऐसे गुलाल न खरीदें। साथ ही गुलाल खरीदते समय देख लें कि उसमें चमकीले कण न हों।
रासायनिक गुलाल त्वचा पर दुष्प्रभाव छोड़ते हैं
जिला अस्पताल के पूर्व चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. एके चौधरी ने बताया कि जिन्हें त्वचा में पहले से एलर्जी की समस्या, चेहरे पर दाग-धब्बे या फिर कील मुहासे हों, उनके लिए यह रसायन काफी नुकसानदायक है। जिनकी त्वचा में कोई दुष्प्रभाव नहीं है, उनको भी इस रासायनिक गुलाल के दुष्प्रभाव से बचना चाहिए। यह न सिर्फ आंखों को बल्कि हमारी त्वचा, हाथ-पैर, होठों पर दुष्प्रभाव डालता है। हर्बल या ऑर्गेनिक गुलाल में रासायनिक पदार्थ बहुत ही कम मात्रा में होते हैं।